कानपुर। माघ मेले शुरू हो गया है लेकिन अभी भी गंगा नदी में गंदे पानी का प्रवाह जारी है। बायोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी की जा रही है। भैरवघाट पंपिंग स्टेशन से लिए गए कच्चे पानी (गंगा जल) की जांच में नाइट्राइट पाया गया है। यह सीवेज मिलने की पुष्टि करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेलों के मद्देनजर गंगा में गंदा पानी जाने से रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रमुख स्नानों से तीन दिन पहले से यहां टेनरियों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम प्रशासन परमिया (रामेश्वर), रानी घाट सहित गंगा और पांडु नदी में गिर रहे प्रमुख नालों के पानी को बायोरेमेडिएशन विधि से शोधित करने का दावा कर रहा है। पर हकीकत यह है कि बायोरेमेडिएशन के नाम पर खानापूरी की जा रही है।
जलकल विभाग भैरवघाट पंपिंग स्टेशन के माध्यम से रोज गंगा से औसतन 20 करोड़ लीटर कच्चा पानी बेनाझाबर वाटर वर्क्स पहुंचाता है, वहां इसे शोधित करने के बाद शहर के करीब 67 वार्डों में आपूर्ति की जाती है। गंगा से लिए गए कच्चे पानी (गंगा जल) की नियमित रूप से लैब में जांच की जाती है। यहां जांच में नाइट्राइट की पुष्टि हुई है। इसका कारण गंगा के किनारे बसी अवैध बस्तियों से सीवेज गंगा में जाना है।
उधर, 5 जनवरी को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने रानीघाट स्थित बायोरेमेडिएशन स्थल का औचक निरीक्षण किया था। वहां बायोरेमेडिएशन कार्य होता मिला। जोन-4 की सहायक अभियंता मीनाक्षी अग्रवाल, अर्बन इंफ्रा विशेषज्ञ राहुल अवस्थी, ठेकेदार कंपनी मेसर्स ऑर्गेनिक 121 साइंटिफिक प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने बताया कि गंगा में रानीघाट, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचैरा घाट, डबका नाला, गुफ्तारघाट, परमिया नाले सहित सात नालों का जल बायोरेमेडिएशन के माध्यम से प्रवाहित किया जा रहा है। गंदा नाला, हलवाखाड़ा, पनकी थर्मल, अर्रा बिनगवां, सागरपुरी व पिपौरी नाले का जल पांडु नदी में शुद्धिकरण के बाद छोड़ा जा रहा है। जोन-4 की अभियंता ने कहा था कि ट्रायल अवधि में बीओडी व सीओडी में 40 प्रतिशत और बाद में 70 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य है। पानी के नमूने जांच के लिए सीएसआईआर भेजे गए हैं। निरीक्षण में रजिस्टर मौके पर न मिलने पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जताई थी और प्रत्येक स्थल पर जल निकासी, रसायन उपयोग व टेस्टिंग रजिस्टर अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए थे।
ऐसे होता है बायोरेमेडिएशन
इस विधि में नदी में गिरने से पहले पानी में विशेष केमिकल डाला जाता है जिसमें मौजूद बैक्टीरिया गंदगी अवशोषित करते हैं। इस प्रकार इस विधि से साफ हुआ पानी नदी में जाता है।
इन तिथियों में जांच में मिला नाइट्राइट
तिथि नाइट्राइट(मिलीग्राम प्रति लीटर)
06 दिसंबर 0.015
08 दिसंबर 0.015
09 दिसंबर 0.015
10 दिसंबर 0.008
11 दिसंबर 0.015
12 दिसंबर 0.015
19 दिसंबर 0.01
20 दिसंबर 0.015
24 दिसंबर 0.02
24 दिसंबर 0.03
29 दिसंबर 0.03
30 दिसंबर 0.03
गंगा में मिला था डॉल्फिन का शव, प्रदूषण से माैत
कानपुर। जाजमऊ के गंगा पुल के नीचे शुक्रवार देर शाम 10 फीट लंबी मछली मृत अवस्था में पड़ी मिली। वन विभाग के अफसरों ने इसे डाल्फिन बताया है जबकि प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ने इसे डाल्फिन मानने से इन्कार किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि गंगा में प्रदूषण के कारण इसकी मौत हुई है।
गंगा वाली खबर में कोट
गंगा में गिर रहे नालों का बायोरेमेडिएशन हो रहा है। फिर भी गंगा में गंदा पानी कैसे पहुंच रहा है। इसे दिखवाऊंगा। बायोरेमेडिएशन की भी रेंडम जांच कराऊंगा। गड़बड़ी हुई तो कार्रवाई की जाएगी। - अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
नाइट्राइट से पेट, नर्वस सिस्टम, गुर्दे में दिक्कत हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को नुकसान हो सकता है। - डॉ. एसके गौतम, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कालेज