7042 ऐसे मतदाता हैं जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। यहां करीब 30 प्रतिशत लोधी राजपूत मतदाता हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में राजपूत मतदाताओं ने भाजपा का साथ दिया और पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को इस विधानसभा से 102876 मत मिले। वहीं, बसपा के राकेश कुमार गोस्वामी को 33018 व सपा के विशंभर प्रसाद निषाद को 29905 मत ही मिले थे।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का जादू कायम रहा
राजपूत समाज से कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह लोधी को मात्र 28601 मतों से संतोष करना पड़ा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जनता ने भाजपा का साथ दिया। प्रत्याशी मनीषा अनुरागी ने 147526 वोट झटके। वहीं कांग्रेस गठबंधन के गयादीन अनुरागी को 42883 व बसपा के अनिल अहिरवार को 38710 वोट मिले। 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं पर भाजपा का जादू कायम रहा।
लोधी राजपूत मतदाताओं ने भाजपा का साथ निभाया
इस बार भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को पहले से ज्यादा 134134 वोट मिले। वहीं, बसपा पार्टी के दिलीप कुमार सिंह को 51157 व कांग्रेस के प्रीतम सिंह किसान को 42235 मत मिले। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी लोधी राजपूत मतदाताओं ने भाजपा का साथ निभाया। इस चुनाव में भाजपा की मनीषा अनुरागी को 139373 वोट मिले।
लोधी मतदाताओं के ध्रुवीकरण को रोका जा सके
वहीं सपा द्वारा राजपूत फैक्टर लागू करने के बावजूद उनकी प्रत्याशी चंद्रवती वर्मा को 77394 मतों से संतोष करना पड़ा था। बसपा को 24266 व कांग्रेस को मात्र 5164 वोट मिले। लोधी (राजपूत) फैक्टर को देखते हुए इस बार सपा ने अजेंद्र सिंह राजपूत को प्रत्याशी बनाया है। तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की नजर राजपूत मतदाताओं पर टिकी हैं। इसी को लेकर प्रधानमंत्री की रैली राठ में होने जा रही, ताकि लोधी मतदाताओं के ध्रुवीकरण को रोका जा सके।
स्वामी ब्रह्मानंद की अनदेखी पड़ती है भारी
बीएनवी डिग्री कॉलेज में बनी त्यागमूर्ति स्वामी ब्रह्मानंद की समाधि लोगों की अगाध आस्था का केंद्र है। इसकी अनदेखी राजनीतिक दलों व उनके प्रत्याशियों को भारी पड़ती है। शहर में आने वाले किसी भी राजनीतिक दल के नेता या स्टार प्रचारक स्वामी जी की समाधि पर नमन करना नहीं भूलते। लोगों की मानें तो वर्ष 2012 में अपने प्रत्याशी के समर्थन में जनसभा करने आईं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने समाधि पर माथा नहीं टेका था। उनका प्रत्याशी बुरी तरह से हारा था।
रेलवे लाइन व विश्वविद्यालय है प्रमुख मांग
राठ से रेलवे लाइन व स्वामी ब्रह्मानंद महाविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाने की मांग दशकों से उठ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह ने रैली संबोधित की थी। प्रदेश में सरकार बनने पर एक माह में रेलवे लाइन का काम शुरू कराने का वादा किया था। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसभा करने आए थे। जनता की मांग पर स्वामी ब्रह्मानंद विश्वविद्यालय निर्माण की घोषणा की थी। चुनाव के बाद इन मांगों पर कोई खास अमल नहीं किया गया। वहीं राठ जिले की मांग भी करीब चार दशक से उठ रही है। इसके लिए धरना प्रदर्शन व आंदोलन होते रहे। जिस पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।
सात बार चुने गए कांग्रेस से विधायक
स्थानीय विधानसभा में सात बार कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई। वहीं एक बार जनता पार्टी, एक बार जनता दल, एक बार भारतीय जनसंघ, तीन बार बसपा, एक बार सपा व दो बार भाजपा प्रत्याशी ने प्रतिनिधित्व किया।
पिछले दो लोकसभा चुनाव में मिले वोट
- वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को क्षेत्र से 1,02,876 मत प्राप्त हुए। जबकि बसपा को 33,018 मत व सपा को 29,905 वोट प्राप्त हुए।
- वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को क्षेत्र से 1,34,134 वोट मिले। बसपा व सपा गठबंधन में बसपा को 51157 मत मिले। कांग्रेस को 42235 मत प्राप्त हुए।
पिछले तीन विधानसभा चुनाव में मिले वोट
- वर्ष 2022 में भाजपा को 139373 मत मिले। सपा को 77394 व बसपा को 24266 वोट प्राप्त हुए।
- वर्ष 2017 में भाजपा को 147526, कांग्रेस व सपा गठबंधन में कांग्रेस को 42883 व बसपा को 38710 मत प्राप्त हुए।
- वर्ष 2012 में कांग्रेस को 91295 व सपा को 55158 मत प्राप्त हुए।