डीसीपी का कहना है कि विवेचना जारी है। लगातार नए मामले भी सामने आ रहे हैं। कई और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, दूसरी तरफ जेवरात खरीदने वाले शहर के छह सराफ रडार पर हैं, जो जूही व नौबस्ता के अलावा स्वरूपनगर का है। स्वरूपनगर वाले को शुभम मालवीय ने जेवरात दिए थे।
सबसे बड़ा सवाल, आखिर एक साल में चार बार क्यों तोड़े लॉकर
पुलिस की जांच में सामने आया है कि पिछले साल चार बार लॉकर इसी ब्रांच में तोड़े गए। पहली बार जुलाई में। दो बार सितंबर और चौथी बार 9 दिसंबर को लॉकर तोड़े गए। डीसीपी ने इस पर सवाल करते हुए कमेटी से पूछताछ की। उन्होंने पूछा कि आखिर एक साल के भीतर चार बार लॉकर क्यों तोड़े गए। जबकि अन्य बैंकों में ये प्रक्रिया कई कई साल में एक बार होती है। इस पर कमेटी ने बस ये कहा कि नियमानुसार ही लॉकर तोड़े गए। डीसीपी इस जवाब से संतुष्ट नहीं है।
शायद ऐसा हुआ होगा
पुलिस को शक है कि पहली बार जुलाई में एक दो लॉकर से जेवरात पार किये गए। फिर इनको लत लग गई। दो तीन लॉकर और पार किए। वहीं, दिसंबर में एक साथ पांच लॉकर से जेवरात पार कर दिए। चूंकि पिछले महीने ग्राहक ने पुलिस से शिकायत की और केस दर्ज कराया, तो खेल का राजफाश हो गया।