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इत्रनगरी में निवेश की दिलचस्पी कम: पिछले साल 129 ने दी थी सहमति, इस बार ये रहा हाल

Sat, 17 Feb 2024 05:35 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
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ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में 19 फरवरी को होने वाले ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए 67 उद्यमियों ने दिलचस्पी दिखाई है। पिछले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अलग-अलग 14 विभागों के तहत कुल 129 निवेशक जुटे थे। यह संख्या आधी से भी कम है। इसको देखकर लगता है कि इत्रनगर में निवेश को लेकर उद्यमियों में दिलचस्पी नहीं है। पिछले साल सरकार की ओर से हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जिले में भी बड़ी संख्या निवेशकों ने अलग-अलग उद्योग को शुरू करने के लिए ओएमयू किया था। उस दौरान अलग-अलग 14 विभागों के तहत कुल 129 निवेशक जुटे थे। इसमें आलू उत्पाद से जुड़े उद्योग लगाने, नया इत्र कारखाना लगाने, कोल्ड स्टोरेज शुरू करने, होटल और शॉपिंग कांपलेक्स शुरू करने के साथ ही तकनीकी शिक्षा संस्था शुरू करने, पशुपालन के तहत डेयरी शुरू करने और खाद सामग्री बनाने की इकाई शुरू करने की रजामंदी दी थी।
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इसके तहत 7450 करोड़ रुपये का निवेश करने का खाका तैयार किया गया था। इस निवेश से जिले में 5713 लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खुलते। इस बार 19 फरवरी को लखनऊ में होने वाली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल होने के लिए उन निवेशकों को खंगाला गया तो उसमें से 67 ही ने इकाई शुरू करने की सहमति दी है। 62 की ओर से कोई सकारात्मक जवाब भी नहीं आया है। ऐसे में प्रशासनिक अमला उन्हीं 67 निवेशकों को ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल कराने की तैयारी में जुटा है।

पिछले साल हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जिले में जिन 129 निवेशकों ने निवेश करने के रजामंदी दी थी, उसमें से दो बड़े निवेशक चेन्नई और अहमदाबाद से थे। अहमदाबाद की कंपनी ने जिले में आलू उत्पाद से जुड़े उद्योग लगाने के लिए 5850 करोड़ रुपये का निवेश करने का वादा किया था। अब उस कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसी तरह चेन्नई की एक कंपनी ने भी आलू उत्पाद आधारित उद्योग लगाने के लिए 200 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए ओएमयू किया था, उसकी ओर से भी अब तक कोई पहल नहीं की गई है। इन इकाई के शुरू होने पर जिले के आलू उत्पादकों को भी मायूसी हाथ लगी है। इससे 2500 लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खुलते।
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जिन 14 विभागों में 129 इकाई शुरू करने के लिए ओएमयू हुआ था, उसमें से आबकारी विभाग, वन विभाग और आवास विकास का खाता भी नहीं खुल सका है। आबकारी विभाग ने 6050 करोड़ के दो ओएमयू कराए थे। दोनों ही निवेशक आगे नहीं बढ़े। इसी तरह वन विभाग की ओर से 20 करोड़ की लागत की छह इकाई लगाने की रजामंदी हुई थी। कोई भी मामला आगे नहीं बढ़ा। आवास विकास ने आठ करोड़ की लागत की एक इकाई शुरू करने के लिए ओएमयू कराया था। यह मामला भी ठप पड़ा है।

पशुपालन विभाग ने 28 इकाई शुरू कराने के लिए ओएमयू कराया था, उसमें से सिर्फ तीन ने ही आगे की रजामंदी दी है। डेयरी विकास विभाग ने नौ इकाई शुरू कराने के लिए पहल की थी, उसमें से सिर्फ एक ने ही इकाई शुरू करने की रजामंदी दी है। एमएसएमई में 28 इकाई के सापेक्ष 17 को इकाई शुरू करने के लिए तैयार कर लिया है।

जिन 14 विभागों के तहत 129 निवेशों ने 7450.59 करोड़ रुपये का निवेश करने की इच्छा जताई थी, अगर वह सभी धरातल पर उतर जाते तो जिले में 5713 युवाओं को रोजगार का मौका मिल जाता। अब जबकि करीब आधे निवेशकों ने किनारा कर लिया है तो बचे हुए 67 निवेशकों की इकाई में अब करीब दो हजार युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

पिछले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जिन निवेशकों ने निवेश की इच्छा जताई थी, उनसे बराबर संपर्क किया जाता रहा। उनमें कई बड़े निवेशकों की कागजी औपचारिकताओं को भी विभागों की मदद से प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया है। 67 निवेशकों ने इकाई शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई है। जिन लोगों ने अभी दिलचस्पी नहीं दिखाई है, वह भविष्य में आगे आएंगे। निवेशकों के लिए प्रशासन का दरवाजा हमेशा खुला है। - शुभ्रांत शुक्ला, डीएम
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