खुशबू के शहर की फिजाओं में देशभक्ति की भावना भी बहती है। यह बात यहां के जांबाजों की बहादुरी साबित भी करती है। इत्रनगरी में एक नहीं ऐसे अनेक योद्धा हैं जिन्होंने समय-समय पर देश के लिए जीवन को दांव पर लगाया है। दुश्मनों से लोहा लेते हुए कई शहीद हो गए तो कइयों ने दुश्मनों को गोलियों से छलनी करते हुए मौत के घाट उतार दिया। अब से 20 साल पहले कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों में पाकिस्तानी फौज को शिकस्त देने वालों में कन्नौज के भी लाल शामिल थे। 24 साल पहले 1999 में तीन मई से 26 जुलाई तक चले कारगिल युद्ध में इत्रनगरी के जांबाजों ने अपनी जांबाजी से दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे।
रामनरेश की टोली में शहीद हुए थे तीन सैनिक
मूल रूप से मूलरूप से ब्लॉक गुगरापुर ब्लॉक के हनुमंत खेड़ा निवासी सेना हवलदार पद से रिटायर स्व. रामनरेश यादव भी कारगिल की जंग में दुश्मनों के दांत खट्टे कर चुके थे। उन्होंने पांच गोलियां खाकर भी मौत को मात दे दी। हालांकि टोली के तीन साथी शहीद भी हुए, लेकिन दो आतंकी भी मार गिराए गए। दो साल पहले उनका निधन हो गया है। परिवार ने उनकी यादों को सहेज कर रखा है। रामनरेश यादव के इकलौते पुत्र प्रवीण यादव इस समय सरायमीरा के देविनटोला में रहते हैं। वह बताते हैं कि पिता राष्ट्रीय रायफल मानसवर्ग में तैनात थे। 13 जुलाई 1999 को दुश्मनों ने उनपर फायर किया। तीन जवान शहीद हो गए। दो साथी घायल हुए, इसमें उनके पिता रामनरेश यादव भी थे।