कानपुर में दिवाली के दिन जीका बम फूटने से पूरे शहर में हड़कंप मच गया। गुरुवार को एक साथ 13 लोगों में वायरस की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही शहर में कुल जीका संक्रमितों की संख्या 49 पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने संक्रमितों को फोन कर घर पर ही रहने की सलाह दी है।
नेशनल वायरोलॉजी सेंटर पुणे से आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ तो सनसनी फैल गई। आनन-फानन में सर्विलांस टीम को सक्रिय किया गया। नए संक्रमितों को फोन कर जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी गई। सभी को होम आइसोलेशन में रहने को कहा गया। संक्रमितों इलाज स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में कराएगा। चपेट में आने वालों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उम्र के लोग शामिल हैं।
ऐसे बढ़ रहा संक्रमण
- 23 अक्टूबर को पहला रोगी मिला
- 30 अक्टूबर को तीन और रोगी मिले
- 31 अक्टूबर को छह रोगी मिले
- 3 नवंबर को 25 रोगी मिले
- 4 नवंबर को 13 रोगी मिले
कुछ तथ्य
- जीका वायरस डेंगू फैलाने वाले मच्छर एडीज से फैलता है
- गर्भवती महिलाओं के लिए यह अधिक खतरनाक है
- गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का विकास नहीं होता
- इसकी मृत्यु दर कम बताई जाती है
- पहली बार वर्ष 1952 में यह अफ्रीका के जंगल में एक लंगूर में मिला
- वर्ष 1954 में इसे विषाणु करार दिया गया
- वर्ष 2007 में एशिया और वर्ष 2021 में केरल और महाराष्ट्र में केस मिले
- 60 फीसदी संक्रमितों में रोग के लक्षण नहीं उभरते
रोग के लक्षण
- हल्का बुखार
- शरीर में दाने और लाल चकत्ते
- सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- आंखों में लाली
- गुलेन बारी सिंड्रोम, न्यूरोपैथी
बचाव
- खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं
- शरीर को फुल आस्तीन के कपड़ों से ढंके रखें
- मच्छरों को घर के आसपास पनपने न दें
- गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर मच्छरों से बचाएं
- घर के टूटे बर्तन, टायर, कूलर में पानी भरा न रहने दें