जुमे की नमाज के बाद कानपुर में पथराव
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दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध में शहर में भारी हिंसा हुई थी। तीन लोगों की मौत हुई थी और पचास से अधिक लोग घायल हुए थे। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल थे। उस दौरान हयात जफर हाशमी आएदिन लोगों को सीएए को लेकर भड़काता था। वीडियो बनाकर फेसबुक पर पोस्ट करता था। खासतौर पर भीड़ जुटाना उसका मकसद रहता था।
अमर उजाला ने इस संबंध में खबर भी प्रकाशित की थी। पुलिस ने उसको कर्नलगंज के केस में आरोपी भी बनाया था लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की थी। इसी तरह पिछले साल प्रतिबंध के बावजूद उसने जुलूस निकाला था। पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया था लेकिन केवल शांतिभंग में कार्रवाई कर छोड़ दिया था। यही वजह है कि वह बेखौफ होता गया और इस बार भी उसने भीड़ जुटाने का एलान किया। तय तारीख पर भीड़ जुटी और बवाल हो गया।
पथराव के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
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ताकि खुद बच सके, बवाल भी हो जाए
सीएए हिंसा में वह प्रदर्शन में तो शामिल हुआ था, लेकिन हिंसा के दौरान वह सीधेतौर पर मौजूद नहीं था। इसी तरह जुलूस के लिए उसने भीड़ तो जुटाई थी लेकिन उसमें भी वह वहां शामिल नहीं हुआ था। यहां भी उसने तीन तारीख को बाजार बंद का एलान किया। वीडियो पोस्ट किया फिर बंद का कार्यक्रम स्थगित करने का दावा किया। मगर ऐसा हुआ नहीं। लोग जुटे और बवाल भी किया। पुलिस अफसरों का कहना है कि ये असल साजिशकर्ता है। इसका मकसद भी पूरा हो जाता है और वह पर्दे की पीछे रहता है, जिससे वह खुद बच सके, बवाल भी हो जाए।
एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन
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संस्था की एक एक गतिविधि खंगाली जाएगी
हयात जफर हाशमी एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन का अध्यक्ष है। पुलिस अफसरों का कहना है कि एसोसिएशन का विस्तार कहां तक है। इससे कौन-कौन लोग जुड़े हैं। फंड कहां कहां से आता है। आदि बिंदुओं पर जांच शुरू की गई है। हयात व उससे संबंधित बैंक खातों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है।