करीब तीन बजे एसीपी नई सड़क पहुंच गए। विवाद शुरू हुआ तो एसीपी व उनके साथ मौजूद सात-आठ पुलिसकर्मियों ने मोर्चा लिया। हाते के बाहर खड़े हो गए। पहली बार में लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया। जब दोबारा भीड़ आई तो पथराव हुआ। इसके कुछ देर बाद सीपी समेत भारी पुलिस बल पहुंचा था।
हयात से की तीन बार बात, भीड़ हटाने को कहा
एसीपी ने बताया कि जब वह एयरपोर्ट से नई सड़क के लिए निकले थे, तो रास्ते में तीन बार हयात से फोन पर बात की। यह भी हिदायत दी कि तत्काल भीड़ को वह हटवाए। हयात ने आश्वासन दिया कि भीड़ को वह हटवा रहा है। मगर ऐसा नहीं किया। एसीपी ने यह भी उससे कहा कि बाजार बंदी की कॉल वापस लेने के बाद ऐसा किया जा रहा है, तो तुम पर ही कार्रवाई होगी, लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना।
बात करना कोई गुनाह नहीं
एसीपी ने कहा कि जब बाजार बंदी का आह्वान किया गया था तो हयात जफर हाशमी को एक जून को कार्यालय में बुलाया गया था। उसको समझाया गया था, तब उसने प्रोग्राम रद्द करने की बात कही थी। एसीपी ने कहा कि हयात उसके क्षेत्र का रहने वाला है। कानून-व्यवस्था के मद्दनेजर उससे बातचीत की गई थी, इसमें कोई गुनाह नहीं है।
शुरू में जब फोर्स कम थी तो एसीपी व थानेदार समेत सात-आठ पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला था। जिस वजह से बवाल नहीं बढ़ा था। पुलिस कमिश्नर का भी यही कहना था। एसीपी व थानेदार की मामले में बेहद सकारात्मक भूमिका रही है। - आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी