मुंबई में कोरोना के तीसरे वैरिएंट डेल्टा प्लस के मिलने के बाद सतर्कता बरती जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज का माइक्रो बायोलॉजी विभाग हर 15 दिन में रोगियों के सैंपल जांच के लिए भेज रहा है। इन सैंपलों की जांच वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट पुणे में होगी।
इसके साथ ही शहरियों से अपील की जा रही है कि मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों का पालन करें। सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह का कहना है कि कोई भी वैरिएंट हो बचत मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से ही होगी। कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के पहले मुंबई, कोलकाता और दूसरे शहरों से लोगों का आना-जाना तेज हो गया था।
इसके बाद जब रोगी बढ़ने लगे तो दूसरे शहरों में काम करने वाले लोग आने लगे। इसी बीच पंचायत चुनाव हुआ और त्योहारों की वजह से भीड़ बिना कोई एहतियात बरते बाजारों में आ गई। इसके बाद दूसरी लहर ने कहर ढाया। सबसे खतरनाक डेल्टा वायरस का संक्रमण था।
लहर के ढलान पर आने के बाद वायरस की पहचान हुई। पश्चिम बंगाल के बाद अब मुंबई में डेल्टा प्लस वायरस के संक्रमित मिल रहेे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मधु यादव ने बताया कि जीन सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजे गए हैं।
अभी तक कुल 131 सैंपल भेजे गए हैं लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है। हर 15 दिन में 15 सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि सतर्कता बरती जा रही है। लोगों को ही अपना अधिक ख्याल रखना है। बचाव का एक ही तरीका है कि कोविड गाइड लाइन का पालन करें।