घटना की जानकारी देतीं आशा गुप्ता
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डकैती जैसा संगीन मामला होने के बाद भी गोविंदनगर पुलिस वारदात पर पर्दा डालती नजर आई। थाना प्रभारी अनूप सिंह अफसरों को मामूली चोरी बताकर गुमराह करते रहे। दोपहर में जब अफसरों को सोशल मीडिया से घटना की सही जानकारी मिली तब छानबीन में तेजी लाई गई।
शुक्रवार दोपहर को एडीसीपी डॉ. अनिल कुमार वारदात स्थल पर पहुंचे। उन्होंने भी पीड़िता आशा गुप्ता से पूछताछ की। एसीपी गोविंदनगर विकास पांडेय को जब पता चला कि थाना प्रभारी ने एफआईआर डकैती के बजाय चोरी में दर्ज की है। तो उन्होंने थाना प्रभारी को फटकार लगाई और स्पष्टीकरण तलब किया। एसीपी ने बताया कि पीड़िता के बयानों के आधार पर डकैती की धारा बढ़ाई जाएगी।
पांच माह पहले ही आईं थीं आशा
आशा की बेटी रानी ने बताया कि मार्च में ही मां अपार्टमेंट में रहने आईं थीं। इससे पहले मां पिता के पैतृक निवासी गोविंद नगर भदौरिया पार्क के पास स्थित मकान में ही रहतीं थीं। पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद यह फ्लैट खरीदा गया था। यहां आने के कुछ ही दिन बाद पिता का देहांत हो गया था।
डेढ़ घंटे तक की लूटपाट
अपार्टमेंट के प्रथम तल पर जी- टू में आशा गुप्ता और जी-वन में दीपक राठी का परिवार रहता है। बदमाश डेढ़ घंटे तक लूटपाट करते रहे, लेकिन पड़ोसियों को भनक तक नहीं लगी। करीब सवा तीन बजे आशा बंधन मुक्त हुईं थीं। सुबह करीब चार बजे कई थानों का फोर्स पहुंचा था।
30 से 35 उम्र के बीच के थे डकैत
आशा गुप्ता ने बताया कि घर में दाखिल हुए डकैत 30 से 35 साल के बीच के थे। जिसमें एक बदमाश काफी मोटा था। आपस में काफी बदतमीजी और तू तड़ाक से बात कर रहे थे। कुछ बदमाशों ने नकाब पहना था कुछ के चेहरे खुले हुए थे। स्केच एक्सपर्ट की मदद से बदमाशों का स्केच बनवाया जा रहा है।