पहले उनका इलाज क्षेत्र के डॉक्टर के यहां चल रहा था। जब सांस फूली तो परिजन कार्डियोलॉजी ले गए, वहां से हैलट रेफर कर दिया गया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके बेटे किशोर ने बताया कि पैथोलॉजी की रिपोर्ट में लिवर, किडनी में भी खराबी आई थी। प्लेटलेट्स काउंट कम था और ब्लड प्रेशर गिर गया था। इसी तरह झाड़ीबाबा क्षेत्र की रहने वाली कुसुमा (65) की वायरल फीवर के बाद मौत हो गई। निजी अस्पताल से उन्हें हैलट रेफर किया गया था। अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दिया।
बहन राधिका ने बताया कि निजी अस्पताल में कहा गया था कि उन्हें आईसीयू की जरूरत है। इसके अलावा वायरल फीवर के बाद हालत बिगड़ने पर कई रोगी आईसीयू में भर्ती हैं। हैलट की फीवर क्लीनिक और संचारी रोग प्रभारी डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि रोगी के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर वायरल संक्रमण से सेप्टीसीमिया हो जाता है। वायरल संक्रमण के बाद लिवर पर पहला असर आता है। उन्होंने बताया कि हैलट में इस वक्त बुखार के 40 रोगी भर्ती हैं।