संभुआ गांव में खेत-तालाब का उपयोग अब सिंचाई से आगे बढ़कर आय बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। यहां एक अभिनव परियोजना के तहत मोती उत्पादन और मत्स्य पालन एक साथ किया जा रहा है। इस परियोजना से करीब 50 लाख रुपये के मोती और प्रति वर्ष चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बिधनू विकास खंड के संभुआ गांव में रविवार को मोती उत्पादन और मत्स्य पालन की पहल का निरीक्षण किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबे, 20 मीटर चौड़े और तीन मीटर गहरे खेत में तालाब बना है। उन्हें तालाब निर्माण पर 50 फीसदी का अनुदान मिला है। इसमें लगभग 30 हजार सीपियों का उपयोग हो रहा है। इनसे प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। विशेष सांचे तकनीक से स्वस्तिक, गणेश और पुष्प जैसी कलात्मक आकृतियों वाले मोती विकसित किए जा रहे हैं।
परियोजना की लागत 18 से 20 लाख रुपये है। उन्होंने अधिकारियों को इसे अन्य किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। रश्मि वर्मा ने कृषि विभाग और मणि एग्रो हब से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। परियोजना को नौ माह पूरे हो चुके हैं। लगभग 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए ताकि किसान इस नवाचार को अपना सकें।