केडीए की तरह जिला प्रशासन भी अपनी जमीन संभाल नहीं पा रहा है। दो साल पहले हुए सर्वे के मुताबिक चारों तहसीलों की ग्राम समाज की दो हजार बीघा जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। इसमें 500 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे तो सिर्फ सदर तहसील में हैं।
लोग आवास बनाकर रहने लगे हैं। प्रशासन भी यहां दखल देने से बचता है। बताते हैं कि ये सभी कब्जे लेखपालों, कानूनगो और नायब तहसीलदारों की मिलीभगत से हुए हैं। अवैध कब्जों को रोकने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। बीते दिनों नर्वल तहसील के पालपुर गांव के बलवान सिंह यादव ने राजस्व परिषद में शिकायत की थी कि गांव में चारागाह, खलिहान, घूरे आदि के लिए आरक्षित 260 बीघा जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।
इस पर आयुक्त एवं सचिव अपूर्वा यादव ने डीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एडीएम फाइनेंस ने जांच शुरू कराई तो पता चला कि यहां 337 अवैध कब्जेदार हैं। इनमें 100 से ज्यादा झोपड़ियां हैं। इनकी आड़ में भूमाफिया ने भी जमीन कब्जा कर पक्के मकान बना लिए हैं।
इसी तरह सदर तहसील के सुरार, भौंती, सचेंडी, भैरमपुर, मझावन, रमईपुर में भी अवैध कब्जे हैं। सुरार में दमादनपुरवा, भौंती में बंगालीपुरवा, सचेंडी में कंजड़ बस्ती ग्राम समाज की जमीन पर बसी है। बताते हैं कि यहां के कुछ लोगों ने दबंगई के बल पर कब्जा किया तो कुछ लोगों को दबंगों ने जमीन बेचकर बसाया। बीते दो साल से जिला प्रशासन की ओर से अवैध कब्जों को लेकर कोई सर्वे नहीं कराया गया और न ही इन्हें खाली कराने के प्रयास हुए।