विधानसभा चुनाव को सकुशल निपटाने के लिए मुख्यालय से तमाम निर्देश आने शुरू हो गए हैं। जिसे लेकर कमिश्नरी और आउटर की पुलिस तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। फिलहाल पुलिस के पास ना तो वाहन हैं और न ही सुविधाएं। ऐसे में मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों को शत प्रतिशत पालन कराना पुलिस के लिए चुनौतियों से कम नहीं है। आलाअधिकारी सिर्फ ये ही मंथन कर रहे हैैं कि सीमित संसाधनों के बीच कैसे चुनाव संपन्न कराए जाएं।
1250 रुपये में कैसे बनेगा शौचालय
10 विधानसभा के सभी बूथों पर शौचालय का इंतजाम कराने के मुख्यालय के निर्देश हैैं। जिसके लिए शासन द्वारा एक टॉयलेट के लिए 1250 रुपये पास किए गए हैैं। जबकि एक शीट की कीमत ही एक हजार रुपये से ज्यादा है। अब सवाल ये उठता है कि अगर अधिकारी इसकी जिम्मेदारी अगर थानेदारों को देते हैं तो बेईमानी की संभावना बढ़ जाती है।
कैमरा नहीं है इंतजाम
अतिसंवेदनशील और संवेदनशील बूथों पर 360 डिग्री मूव करने वाले कैमरे लगाए जाने हैैं। कमिश्नरी और आउटर में एक भी 360 डिग्री पर मूव करने वाला कैमरा नहीं है। वहीं हर विधानसभा में ड्रोन से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैैं। अगर उपद्रवी छत पर कोई हथियार (ईंट पत्थर, पेट्रोल बम) इकट्ठा किए होंगे तो उसे देखने के लिए ड्रोन मददगार होगा।
बूथों से चंद कदम की दूरी पर कोई योजना बनाई जा रही होगी तो उसके लिए भी ड्रोन हेल्पफुल होगा। अगर ड्रोन की बात की जाए तो एक खराब ड्रोन कमिश्नरी में हैैं। निगरानी के लिए ड्रोन 80 हजार का नया आता है और 800 रुपये रोज किराए पर आता है। मुख्यालय से आए आदेशों में कहीं भी ये नहीं लिखा है कि ड्रोन कहां से आएगा?