कानपुर में सिर्फ 700 रुपये के लिए दंपती की हत्या करने वाले रतन उर्फ महेंद्र को अपर जिला जज दशम नित्यानंद श्रीनेत ने उम्रकैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 18 साल पुराने मुकदमे में एक अभियुक्त के फरार हो जाने के कारण उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट व कुर्की की आदेशिका जारी की गई है जबकि एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।
गोविंदनगर कच्ची बस्ती में सुंदरलाल पत्नी चंदा के साथ रहता था। उसके पड़ोस के मकान में भोला, राजेश व रतन उर्फ महेंद्र किराये पर रहते थे। विनोद उर्फ लाला ने इन लोगों को कमरा किराये पर दिलाया था इसलिए उसका भी इनके घर आनाजाना था। भोला, राजेश व लाला ने सुंदरलाल से 700 रुपये उधार लिए थे।
जब सुंदरलाल व उसकी पत्नी चंदा ने 30 जनवरी 2005 को रुपये वापस मांगे तो झगड़ा कर जानमाल की धमकी दी थी। अगले दिन सुंदरलाल और चंदा का घर में ही शव मिला था। भोला, राजेश, रतन व विनोद फरार थे। पड़ोसी राधेश्याम विश्वकर्मा ने गोविंदनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एडीजीसी प्रद्युम्न अवस्थी ने बताया कि भोला, राजेश, रतन व विनोद के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। राजेश की फाइल अलग चल रही है। सुनवाई के दौरान विनोद की मौत हो गई जबकि सजा से बचने के लिए मंगलपुर निवासी भोला फरार हो गया। कोर्ट ने सचेंडी निवासी रतन उर्फ महेंद्र को दोषी मानकर सजा सुनाई है।