जीआरपी थाने में अपनी माताओं से लिपट कर रोते आरिफ और उमर
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कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मंगलवार दोपहर दो बच्चे अपनी माताओं से बिछड़ गए। दोनों बच्चे आपस में मामा-भांजे हैं। एक तरफ दोनों माताएं बच्चों की तलाश में बदहवास इधर-उधर घूम रहीं थीं, तो दूसरी तरफ बच्चे बिलख रहे थे। बच्चों को रोता देख जीआरपी उन्हें महिला हेल्प डेस्क में ले आई। मोबाइल नंबर पर संपर्क कर उनकी माताओं को बुलाया गया। इसके बाद दोनों बच्चे अम्मी-अम्मी कहकर उनके गले से लिपट गए।
प्रयागराज के खान चौराहा निवासी फातिमा चार साल के बेटे आरिफ, बहन की बेटी सुनैना खातून और उसके तीन वर्षीय बेटे उमर के साथ मंगलवार सुबह 11:15 बजे सेंट्रल स्टेशन पर उतरीं। यहां से देवाशरीफ जाना था। जीआरपी इंस्पेक्टर अनिल शर्मा ने बताया कि फातिमा और सुनैना बाराबंकी जाने वाली ट्रेन का पता करने के लिए पूछताछ केंद्र गईं। इस बीच आरिफ और उमर इधर-उधर हो गए। फातिमा और सुनैना ने स्टेशन में बच्चों को खोजने के बाद सिटी साइड की ओर बाहर चली गईं।
इधर आरिफ और उमर प्लेटफार्म नंबर चार पर पहुंच गए। उन्हें रोता हुआ देख जीआरपी स्टाफ दोनों को महिला हेल्प डेस्क ले आया। आरिफ ने अपनी अम्मी का नंबर दिया। इसके बाद उनसे संपर्क कर मौके पर बुलाया गया। बच्चों को पाकर दोनों ने राहत की सांस ली। दोनों महिलाओं ने जीआरपी स्टाफ को धन्यवाद दिया।
एक और बच्चे को जीआरपी ने परिवार से मिलाया
हरबंशमोहाल निवासी राजू का तीन साल का बेटा रिषभ मंगलवार को परिवार से बिछड़ गया। वह सिटी साइड की ओर रोता हुआ नजर आया। किसी यात्री ने जीआरपी स्टाफ को सूचना दी। जीआरपी उसे महिला हेल्प डेस्क ले आई। कुछ देर बाद उसकी मां किरण रोते हुए वहां पर आई। बच्चे को देखकर राहत की सांस ली। महिला के मुताबिक वह सुबह काम के लिए घर से निकली थी, पीछे से उनका बेटा भी आ गया।