इससे पहले 15 फरवरी को भी रात आठ बजे औचक निरीक्षण में पांच पंप बंद मिले थे। तब भी गंदा पानी गंगा में जा रहा था। सोमवार को गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर नालों को गंगा में गिरने से रोकने को कहा गया है। साथ ही रिपोर्ट भी मांगी गई है। उन्होंने बताया कि चार नाले भी गंगा में गिर रहे हैं, जबकि इन्हें 2018 में बंद करने का आदेश था। प्रति नाला प्रति माह के हिसाब से पांच लाख का जुर्माना लगातार छह महीने लगाया गया है।
सीसामऊ से पानी का रिसाव अभी भी ठीक नहीं हुआ
गंगा किनारे बने सबसे बड़े सीसामऊ नाले को करीब सात साल पहले टैप किया गया था, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण अभी भी वहां से अक्सर पानी का रिसाव सीधे गंगा में होता रहता है। कई बार के निरीक्षण के बावजूद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई इसका हल नहीं खोज पाई है। पिछले महीने जिलाधिकारी ने जाकर इस मामले को देखा था। इसमें पता चला था कि यहां पर स्थापित टेफ्को कॉलोनी से एक पाइप लाइन नाले से सटकर गंगा की तरफ जा रही है। विभाग को चेतावनी दी गई थी कि इसे ठीक किया जाए।