अभी नहीं मिली है किसी को क्लीनचिट
जेल में निरुद्ध तत्कालीन निलंबित लेखपाल अशोक सिंह पर षड़यंत्र व नुकसान करने और चालक दीपक पर उतावलेपन में बुलडोजर चलाने की धारा में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। दर्ज एफआईआर में अभी किसी आरोपी को क्लीन चिट नहीं दी है।
विवेचना में शामिल हुए फौजी
अलबत्ता विवेचना में प्रकाश में आए फौजी गौरव का नाम बढ़ाया है। आगे की विवेचना जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार एसआईटी के पास घटना वाले दिन के कई वीडियो हैं। इसमें एक वीडियो में झोपड़ी में मौजूद परिवार का करीबी एक शख्स आगी वागी लगा दो कहता दिख रहा है।
वीडियो में कहा- आगी वागी लगा दो
वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की आवाज का सैंपल और वीडियो को लैब में जांच के लिए भेजा गया था। जानकारों का कहना है कि वीडियो में दिख रहा शख्स ही आगी वागी लगा दो कह रहा है। हालाकि वाइस सैंपल की लैब रिपोर्ट आने का एसआईटी को इंतजार है। लैब रिपोर्ट से पुष्टि हो सकेगी।
चाहला में पहली बार 14 जनवरी को झोपड़ी में लगी थी आग
मड़ौली के चालहा गांव में अफसरों के सामने आग लगने से झोपड़ी में 13 फरवरी को मां बेटी जिंदा जल गई थीं। एसआईटी की विवेचना में सामने आया कि लेखपाल दूसरे पक्ष और शिकायतकर्ताओं से मिला हुआ था। उसने कब्जा बेदखली के लिए षड़यंत्र के तहत कार्य किए।
झोपड़ी में 14 जनवरी को भी लगी थी आग
विवेचना में यह भी सामने आया है कि मां बेटी के जलने वाले दिन के पूर्व 14 जनवरी को पहली बार झोपड़ी में आग लगाई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार तहसील की टीम ने 14 जनवरी को कब्जा बेदखली की कार्रवाई शुरू की तो मृतका के पुत्र ने झोपड़ी में जाकर आग लगा ली थी। एक सिपाही ने उसे बाहर निकाल कर बचाया था।
तीन फौजियों की जुगलबंदी में तबाह हुआ परिवार
चालहा की घटना से प्रदेश की राजनीति गर्म हो गई। एक परिवार तबाह हो गया। शासन के निर्देश पर एसआईटी की विवेचना जारी है। मड़ौली में तैनात तत्कालीन निलंबित लेखपाल अशोक ङ्क्षसह पूर्व फौजी है। उसकी गांव के फौजी गौरव से खूब पटती थी। जबकि बुलडोजर मालिक सर्वेंद्र सिंह भी फौजी है।
तीनों की जुगलबंदी में तबाह हुआ परिवार
इन तीनों की जुगलबंदी में एक परिवार तबाह हो गया। एसआईटी की अब तक की विवेचना में यह सामने आया है कि श्रीनगर में तैनात फौजी गौरव लगातार लेखपाल अशोकस सिंह के संपर्क में था। घटना के पहले वह छुट्टी पर गांव आया था। बाद में उसने 40 दिन की छुट्टी बढ़वाई।
चालक के उतावलेपन में चल गया था बुलडोजर
नौ फरवरी को छुट्टी पूरी हो रही थी तो वह 6 फरवरी को गांव से चला गया। अलबत्ता फोन पर लेखपाल से बातचीत करता रहा। 13 फरवरी को उसने श्रीनगर से सर्वेंद्र को फोन कर बुलडोजर का इंतजाम किया था। चालक के उतावलेपन में बुलडोजर चलाने से मां बेटी की जान चली गई।