16 साल से एक ही ब्लॉक में जमे हुए थे सचिव
इसमें सात ग्राम पंचायत अधिकारी और नौ ग्राम विकास अधिकारी हैं। सीडीओ ने ऐसे सचिवों के नाम फाइलों से बाहर निकाले जो 16 साल से एक ही ब्लॉक में जमे हुए थे। यह जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की सिफारिश के कारण हटाए ही नहीं गए थे।
भुगतान के लिए फर्जी बिल-बाउचर भी लगाए
तबादला होने के बाद सभी सचिवों को क्लस्टर भी आवंटित कर दिए थे और अगले दिन नवीन स्थान पर ज्वाइन करना था। जिन सचिवों ने ग्राम पंचायतों में लाखों का विकास कार्य करा दिया था, उसका भुगतान बाकी था। ऐसे में तबादला होते ही सचिवों ने कुछ विकास कार्यों और कुछ फर्जी बिल-बाउचर लगाए।
उच्च अधिकारियों ने जानबूझकर रिलीव नहीं किया
साथ ही, लाखों रुपये का राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त धनराशि से 18 जून तक भुगतान करते रहे। यह सारा खेल विभाग में बैठे कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ। नियम है कि तबादला होने के बाद सचिव वित्तीय भुगतान नहीं कर सकता। इन्हें जानबूझकर उच्च अधिकारियों ने रिलीव नहीं किया।
इन सचिवों का खेल आया सामने
ब्लॉक बिधनू के अजीत सिंह ने करीब 21.64 लाख रुपये, राजेश कुमार ने 24.40 लाख रुपये और शिवपाल ने 7.42 लाख रुपये, पियूष सचान ने 11 लाख रुपये का भुगतान 18 जून तक किया। तबादले के बाद सभी सचिवों के डोंगल की जांच हो जाए, तो इसमें और भी फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
तबादले के बाद वित्तीय भुगतान करना पूरी तरह से गलत है। अगर सचिवों ने मनमानी भुगतान किया है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। अगर फर्जी बिल लगाकर भुगतान हुआ है, तो कार्रवाई होगी। -मनोज कुमार, डीपीआरओ
तबादला के बाद सरकारी धन का भुगतान करना गलत है। अगर सचिवों ने ऐसा किया है, तो निश्चित जांच होगी। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी। -जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी