कोरोना काल में मास्क, सैनिटाइजर की खरीदारी में अनियमितता की जांच कर रही रेलवे के डिप्टी सीएमएम हिमांशु शुक्ला की अध्यक्षता वाली जांच टीम को रविवार को कई तथ्य मिले हैं। पता चला कि कानपुर सेंट्रल स्टेशन के वाहनों की पार्किंग का ठेका खत्म होने के बाद भी कागजों पर चलता रहा।
नाम के लिए यह रेलवे का कॉमर्शियल विभाग चला रहा था लेकिन वास्तव में इसका संचालन ठेकेदार कर रहा था। इससे लाखों रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। बुकिंग, रिजर्वेशन समेत अन्य ऑफिसों में ड्यूटी शिफ्ट मन मुताबिक कराने की भी जांच टीम ने की है।
कोरोना काल में एक पास कानपुर से न्यू जलपाईगुड़ी का जारी तो हुआ है पर इस बात का प्रमाण नहीं मिला है कि आखिरकार किस वजह से पास जारी हुआ है। इस दौरान कोई विभागीय कार्य का उल्लेख नहीं किया गया है। सबसे बड़ा घोटाला सीपीसी माल गोदाम का सामने आ रहा है।
इसमें व्यापारियों को आसानी के लिए रेलवे गोदाम में ही माल रखा गया, जिससे व्यापारी अपनी सुविधा के हिसाब से यहां से माल सीधे फुटकर विक्रेताओं और डीलरों को भेजते रहे। इससे व्यापारियों का गोदाम खाली रहा, उन्हें यहां से माल उठाने का भाड़ा बचा और रेलवे का प्रति घंटे के हिसाब से डैमेज चार्ज का भी घाटा होता रहा। यह सब सीपीसी माल गोदाम के सीजीएस की मिलीभगत से हुआ। यह मामला एक साल पहले ही पकड़ा जा चुका है। अब इसकी जांच हो रही है।