मौसम में बदलाव से डायरिया अधिक आक्रामक हो गया है। डायरिया के बाद रोगी शॉक की स्थिति में पहुंच जा रहे हैं। इसके साथ ही गुर्दे फेल हो रहे हैं। बुधवार को दो रोगियों की मौत हो गई। डायरिया के बाद बेहोशी की हालत में उन्हें अस्पताल लाया गया था। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि रोगियों के सैंपल का कल्चर टेस्ट कराया जा रहा है। म्यूटेशन के कारण किसी वायरस और बैक्टीरिया में बदलाव हो सकता है।
आजादनगर के रहने वाले राम सेवक (61) को सुबह से डायरिया शुरू हुआ। परिजनों ने बताया कि दो-चार मोशन में ही बेहोशी आने लगी तो न्यू शिवली रोड के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां ब्लड प्रेशर नहीं मिला तो हैलट रेफर कर दिया। हैलट इमरजेंसी पहुंचने के पहले ही मौत हो गई। इसी तरह काकादेव की रेवती (52) की डायरिया के बाद मौत हुई है।
एक सप्ताह पहले उनके गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ था। बुधवार सुबह पेट दर्द के बाद तेज बुखार और डायरिया शुरू हो गया। निजी अस्पताल ले गए लेकिन मृत घोषित कर दिया गया। डॉ. काला का कहना है कि इस बार डायरिया में डिहाइड्रेशन बहुत जल्दी हो जा रहा है। ऐसा क्यों हो रहा? यह कल्चर रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा।