कानपुर देहात। बिल्हौर क्षेत्र में फर्जी वसीयत के आधार पर जमीन हड़पने के मामले में कोर्ट ने लेखपाल समेत तीन लोगों को दोषी करार देते हुए सात साल कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अर्थदंड भी लगाया है।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी रमेशचंद्र ने बताया कि कानपुर नगर के पुरानी दाल मंडी निवासी सुरेंद्र नारायण ने जून 1995 में शिवली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी पैतृक भूमि बिल्हौर के बिरोहा गांव में दादी अनुराग भरी के नाम थी।
दादी की मृत्यु के बाद जमीन चाचा व पिता के नाम आ गई। करीब सात वर्ष बाद 1992 में बिरोहा गांव के प्रधान संतोष कुमार अग्निहोत्री ने लेखपाल गणेश शंकर दीक्षित, राजेंद्र चतुर्वेदी व सुमन कुमार के सहयोग से राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर भूमि अपने नाम करा ली।
पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। केस की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलंकृता शक्ति त्रिपाठी की कोर्ट में चल रही थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सुमन कुमार की मौत हो गई। इसपर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
वहीं, बचाव व अभियोजन की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने तत्कालीन प्रधान संतोष कुमार अग्निहोत्री, तत्कालीन लेखपाल गणेश शंकर दीक्षित व राजेंद्र चतुर्वेदी को दोषी करार दिया।
तीनों को सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 60-60 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर सभी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।