कानपुर देहात। फसलों को अपने पानी से हराभरा करने वाली यमुना की सहायक नदी सेंगुर तंत्र की लापरवाही से बदहाल हो गई है। नदी में जगह-जगह सिल्ट जम है, इससे सेंगुर की धारा भी अवरुद्ध है। अब नदी को पुनर्जीवित करने की पहल मनरेगा योजना से की जा रही है।
इसके लिए जलनिगम ने अपनी कार्ययोजना उपायुक्त मनरेगा को सौंप दी है। इसके तहत 41 गांवों में 2615 लाख रुपये से कुल 64 चेक डैम बनवाने का कार्य प्रस्तावित किया गया है। यह कार्य होने पर हजारों लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अन्य विभागों से कार्ययोजना मिलना बाकी है।
जिले में मुख्य रूप से चार नदियां बहती हैं। इसमें यमुना, सेंगुर, रिंद व पांडु नदी शामिल हैं। पूर्व में पांडु नदी की सफाई कराई जा चुकी है, लेकिन सेंगुर के पुनरोद्धार के लिए पहल नहीं हो सकी थी। अनदेखी के चलते कभी फसलों की सिंचाई में अहम भूमिका निभाने वाली सेंगुर अब बदहाल पड़ी है।
सिल्ट से धीरे-धीरे नदी की धारा अवरुद्ध होती चली गई। इतना ही नहीं कई जगह नदी की पटरी भी गायब हो गई है। ऐसे में नदी को फिर से पुराने स्वरूप में लाने के लिए मनरेगा के तहत जिम्मा उठाया गया है।
इसके लिए कई विभागों को सामूहिक रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है। फिलहाल जलनिगम कार्य का ब्योरा सौंप दिया है। वहीं, उद्यान, कृषि, वन विभाग, नलकूप समेत कई और विभागों की ओर से कार्ययोजना मिलना शेष है।
मनरेगा से सेंगुर नदी को पुनर्जीवित करने के लिए कई विभागों के सहयोग से योजना बनाई गई है। इससे नदी का कायाकल्प होने के साथ ही हजारों लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। जलनिगम के कार्यों का ब्योरा मिल गया है। अन्य विभागों को भी पत्र भेजकर कार्य का विवरण मांगा गया है। इसके मिलते ही संयुक्त कार्ययोजना बनाकर आगामी वित्तीय वर्ष में कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - हरिश्चंद्र (उपायुक्त मनरेगा)