उनके दो बच्चे श्रेयांश (3) और नित्या (5) हैं। शुक्रवार की सुबह पति अर्पित सपना को जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां डॉ. निशांत पाठक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया गया। इसी बीच पतारी के एक व्यक्ति ने सपना की रूरा निवासी बुआ रेखा को इसकी सूचना दी।
वहां से मायके में सूचना पहुंचने पर सपना के पिता उमाकांत, बहन साक्षी व परिवार के अन्य लोग जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पतालकर्मियों से शव दिखाने को कहा तो कर्मचारियों ने पुलिस के आने के बाद ही पोस्टमार्टम हाउस का ताला खोलने की बात कही। इससे नाराज परिवार के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर जिला अस्पताल के चौकी प्रभारी राजेश कुमार मौके पर पहुंचे और पोस्टमार्टम हाउस का ताला खुलवाकर सपना का शव दिखाया। सपना की बेटी नित्या ने पुलिस और मीडिया कर्मियों के सामने रोते हुए बताया कि पापा अक्सर मम्मी के साथ मारपीट करते थे।
उन्होंने शनिवार को भी मम्मी को पहले मारा और फिर गला दबाकर फंदे से लटका दिया। इस पर परिजनों ने दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगा मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। दोपहर में सीएमओ डॉ. एके सिंह ने पोस्टमार्टम के लिए डॉ. राकेश यादव, डॉ. बृजेश कुमार और डाॅ. सोनाली का पैनल बनाया।
बहन बोली- सास करती थी प्रताड़ित
सपना के ससुर राजकुमार की पहली पत्नी की मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी शादी आशा से की थी। मृतिका की बहन साक्षी ने आरोप लगाया कि बहन सपना को सास आशा हर बात पर प्रताड़ित करती थीं। वह अक्सर फोन में उससे इसका जिक्र भी करती थीं।