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कानपुर देहात : परौंख में सहपाठियों को अपने ‘राम’ से मिलने का इंतजार, किया आवेदन

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जसवंत सिंह ने राष्ट्रपति का कुछ इस तरह किया था स्वागत। (फाइल फोटो) - फोटो : AKBARPUR
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डेरापुर। पैतृक गांव परौंख में तीन जून को राष्ट्रपति के आगमन को लेकर उनके सहपाठी व लोगों में उत्सुकता है। अपने ‘राम’ से मिलने के लिए गांव के लोगों ने आवेदन भी किया है। अब उन्हें प्रशासन से बुलावे का इंतजार है।
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एक साल पूर्व परौंख आगमन पर राष्ट्रापति रामनाथ कोविंद ने प्राथमिक शिक्षा के सहपाठी रहे जसवंत सिंह से मिलकर हालचाल जाना था। जसवंत सिंह ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया था और बचपन की यादें भी ताजा की थीं।
अब फिर से राष्ट्रपति के परौंख आने की सूचना से साथियों में उत्सुकता है। जसवंत सिंह ने भावुक होकर बताया कि राष्ट्रपति ने जो स्नेह दिया वो आज भी स्मरणीय है। इस बार भी मिलने के लिए आवेदन किया है। बुलावे का इंतजार है।
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गांव के विजय पाल सिंह भदौरिया भी उनके बाल सखा है। कुछ माह पूर्व उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने परौंख आकर मिलने की बात भी कही थी। राष्ट्रपति के आगमन की जानकारी पर उन्होंने भी मिलने के लिए आवेदन किया है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पिता के मित्र सौ वर्षीय मोती लाल गुप्ता भी उनके आगमन पर खुश हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार परौंख आगमन पर उन्हें पिता तुल्य सम्मान दिया था। अपने कोविंद से मिलने का उन्हें इंतजार है। वे बेटे समान रामनाथ कोविंद को दोबारा राष्ट्रपति बनने का आशीर्वाद देंगे।
शांती भाभी को भी कोविंद से मुलाकात की आस
परौंख निवासी दशरथ सिंह गौर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सहपाठी थे। वह उनसे एक माह उम्र में बड़े थे। इस पर रामनाथ कोविंद उन्हें दशरथ भैया कहते थे। वहीं, उनकी पत्नी शांती देवी गौर को राष्ट्रपति भाभी मानते हैं। शांती देवी गौर ने बताया कि जब भी राष्ट्रपति पथरीदेवी मंदिर या रहनिया चौक आते तो पति दशरथ सिंह से जरूर मिलते। वे अक्सर घर के दरवाजे पर खड़े होकर पूछते कि भाभी दशरथ भैया हैं या नहीं।
पति का पांच जनवरी 2017 को निधन हो गया। उस समय रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल थे। जानकारी पर उन्होंने पत्र भेजकर दुख प्रकट किया था। अब उनका तीन जून को गांव आगमन है। उनसे मिलने की इच्छा है। इसके चलते राष्ट्रपति सचिवालय की वेबसाइट के माध्यम से मिलने का अनुरोध किया है। यदि अनुरोध उन तक पहुंचा तो उन्हें विश्वास है कि वे गांव आगमन पर मिलने के लिए निश्चित समय देंगे।
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