अगर किसी को पहले चिकन पॉक्स हुआ है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो वायरस फिर उभार मार देता है। इसकी हरपीज जोरेस्टर कहते हैं। उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि चिकन पॉक्स के कुल रोगियों में 90 फीसदी बच्चे होते हैं। अगर कोई बच्चा संक्रमित है तो उसे स्कूल न भेजें। दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगवाया जा सकता है।
ऐसे करें बचाव
रोगी को आराम करने दें, उसे साफ-सुथरे कमरे में रखें।
शरीर में पड़े दाने फोड़ें मत, उनके खुद से फूटने का इंतजार करें।
रोगी के बेड की चादर साफ-सुथरी रखें।
गर्म तरल पेय पदार्थ का सेवन न करें।
दाने फूटने पर साफ और हल्के सूती कपड़े से सहलाएं।