एसपी आउटर अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि शुरुआती जांच में जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई उसमें दरोगा विनीत कुमार, दरोगा कृष्णकांत व हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार पाल को निलंबित कर दिया गया है।
गल्ला व्यापारी अरुण कुमार गुप्ता के साढ़ थाने में जहर खाकर खुदकुशी करने के मामले में पांच पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। दो दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं जबकि दो अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।
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शुरुआती जांच में ये सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। हालांकि एसपी ने साढ़ थानेदार पर मेहरबानी की। थानेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ जांच का हवाला दिया जा रहा है। साढ़ थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव निवासी गल्ला व्यापारी अरुण कुमार गुप्ता (45) के गोदाम में बीते सोमवार को चोरी हुई थी।
उन्होंने गांव निवासी मिथुल त्रिवेदी को रंगेहाथ पकड़ा था। मगर वह भाग निकला था। वह दो दिनों तक थाने गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गुरुवार को पुलिसकर्मियों ने अरुण को ही पीट दिया और दो घंटे तक हवालात में डाल दिया था। इससे क्षुब्ध होकर अरुण ने शुक्रवार सुबह थाने पहुंचकर जहर खाकर जान दे दी थी।
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एसपी आउटर अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि शुरुआती जांच में जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई उसमें दरोगा विनीत कुमार, दरोगा कृष्णकांत व हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार पाल को निलंबित कर दिया गया है। थाने के दो अन्य सिपाहियों को लाइन हाजिर किया गया है। इन सभी के खिलाफ प्रारंभिक जांच एएसपी आउटर आदित्य कुमार शुक्ला को सौंपी गई है।
खुदकुशी के जिम्मेदार पुलिसकर्मी, तो एफआईआर क्यों नहीं
अरुण के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने अरुण को प्रताड़ित किया। जिससे वह मानसिक रूप से तनाव ग्रस्त हो गए थे। पुलिसकर्मियों की करतूत से वह अपमानित महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने खुदकुशी कर ली। सीधे तौर पर ये दोषी पुलिसकर्मी अरुण की मौत के जिम्मेदार हैं।
तो इनपर एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। अधिवक्ता संदीप कुमार शुक्ला ने बताया कि इसमें आत्महत्या दुष्प्रेरण (धारा 306) यानी खुदकुशी के लिए मजबूर करने, मारपीट आदि धारा में केस दर्ज किया जाना चाहिए।