केस-दो
दबौली के सुरेश कुमार कश्यप की शादी तत्याटोपे नगर की रहने वाली शिखाकुमारी कश्यम के साथ सामूहिक विवाह के तहत शादी हुई। आवेदन एक सप्ताह पहले किया लेकिन विभाग ने सत्यापन तक नहीं कराया। ऐसे में जोड़ा बिना अनुदान-उपहार लिए शादी के बाद लौट गया।
कानपुर शहर की 27 आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों को समाज कल्याण विभाग की लापरवाही के कारण मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ नहीं मिल सका है। शादी के दिन मंडप के नीचे सात फेरा लेकर बेटियां बिना उपहार लिए ससुराल चली गईं। मामले की शिकायत होने पर डीएम ने सीडीओ से जांच कर रिपोर्ट मांगी है। समाज कल्याण विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक लाख रुपये का लाभ पात्र जोड़ों को दिया जाता है।
60 हजार रुपये का चेक, 25 हजार रुपये की उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये खाने के लिए खर्च किए जाते हैं। 11 मई को मोतीझील लॉन में समाजकल्याण समिति सेवा की तरफ से सामूहिक विवाह का आयोजन हुआ था। इसमें कुल 98 कन्याओं की शादी हुई थी। इसमें 27 कन्याएं वे थीं जिन्होंने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में आवेदन किया था।
आवेदन पत्रों का सत्यापन तक नहीं कराया
जिलाधिकारी के निर्देश पर शादी की तय तारीख से एक सप्ताह पहले गरीब कन्याओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए समाज कल्याण समिति सेवा के सचिव धनीराम पैंथर ने 27 कन्याओं के ऑनलाइन आवेदन भी करा दिए थे। इसके बावजूद समाज कल्याण विभाग ने आवेदन पत्रों का सत्यापन तक नहीं कराया। इस कारण योजना के तहत शामिल जोड़े शादी के मंडप के नीचे सात फेरे लेकर बिना उपहार-अनुदान लिए अपने घर चले गए।
डीएम ने जांच कर मांगी है रिपोर्ट
धनीराम ने गरीब बेटियों को अनुदान दिलाने के लिए समाज कल्याण विभाग के कई चक्कर काटे लेकिन विभाग के अफसर से लेकर पटल बाबू टरकाते रहे। अंत में धनीराम पैंथर ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के जनता दर्शन में गरीब बेटियों को अनुदान दिलाने की गुहार लगाई। मामले को संज्ञान में लेकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीडीओ दीक्षा जैन से जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
फर्म का नहीं हुआ चयन, इसलिए नहीं मिल सकता लाभ
धनीराम ने योजना का लाभ न मिलने पर जुलाई में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी। विभाग ने जवाब में कहा था कि योजना 2025-26 में आवेदन करने एवं भुगतान की प्रक्रिया बदल दी गई। इस कारण उपहार सामग्री खरीदने के लिए फर्म का चयन नहीं हो सका। इसलिए योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है। यह भी कहा कि समिति यदि चाहे तो ये आवेदन शादी अनुदान योजना के तहत करे तो जांच के बाद पात्रों को लाभ दिया जा सकता है।
समिति के सचिव ने कई आवेदन ऑनलाइन कराए थे लेकिन समाज कल्याण विभाग ने सत्यापन ही नहीं कराया है। यह विभाग की लापरवाही है। इसकी जांच के लिए विभाग से जिओ मांगा गया है। दोषियों पर कार्रवाई होगी। -दीक्षा जैन, सीडीओ