दस हजार प्रीएक्टिवेटेड सिम जारी करने का मामला एक साल पुराना है। तब सर्विलांस ने नंबरों को ट्रेस कर जांच अधूरी छोड़ दी थी। अब उसकी जांच आगे बढ़ाई है। तभी खुलासा हुआ था कि ये दस हजार सिम दो मोबाइलों से एक्टिवेट किए गए थे। यानी पूरे मामले में एक ही गिरोह का हाथ है।
असम से प्रीएक्टिवेटेड सिम लाकर यूपी में बेचने वाला सरगना मथुरा का रहने वाला है। वो एक जमाती है। जमात में शामिल होकर असम जाता था और सिम लाता था। शहर में पिछले दो साल के भीतर सैन्य अफसर बनकर ठगी के 400 से अधिक शिकायतें पुलिस के पास पहुंची। एडीसीपी दीपक भूकर ने बताया कि तब इसमें काफी लंबी जांच की गई थी।
जिसमें पता चला था कि जिन नंबरों से ठग फोन करते थे वो अधिकतर असम के थे। आगे की जांच की तो पता चला कि असम से दस हजार से अधिक प्रीएक्टिवेटेड सिम बेचे गए। जिनके जरिये ठगी की गई। एडीसीपी ने बताया कि एक बड़ा तथ्य और सामने आया था कि सभी सिमों को दो आईएमईआई नंबरों से ही एक्टिवेट किया गया था। यानी दो मोबाइलों का इस्तेमाल कर इन सिमों को एक्टिवेट कर बेचा गया।
जमाती है यहां का सरगना
मथुरा के गोवर्धन थाना क्षेत्र निवासी एक जमाती इस खेल का बड़ा खिलाड़ी है। वो जमात में शामिल होकर असम जाता था। वहां से सैकड़ों सिम खरीदकर लाता था। एक सिम करीब पांच सौ रुपये में खरीदता था। जो यहां पर दो हजार तक में बेचता था। जमात में शामिल होकर जाने से वो पकड़ा नहीं जाता था। इस शख्स ने यूपी, राजस्थान व दिल्ली में भी प्रीएक्टिवेटेड सिम बेचे हैं।
अब क्राइम ब्रांच सबसे पहले इसी शख्स को पकड़ने के प्रयास में लगी है। हालांकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना बड़ी चुनौती है। अफसरों के मुताबिक सभी सिम एक ही कंपनी (एयरटेल) के हैं। इसमें टेलीकॉम कंपनी के एजेंट की बड़ी भूमिका हैं। आशंका है कि यूपी के अलावा बंगाल, एमपी, बिहार, झारखंड आदि राज्यों में भी यहीं से प्रीएक्टिवेटेड सिम की सप्लाई की जा रही है।