रात 12 बजे कृष्ण का जन्म होते ही घरों और मंदिरों में घंटा और घड़ियाल बजने के साथ ही जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी... की गूंज सुनाई देने लगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व सोमवार को घरों व मंदिरों में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। कानपुर के मुख्य मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ऑनलाइन माध्यम से दिखाया गया।
घरों में लोगों ने झांकियां सजाई। झूले में विराजमान कर आरती उतारी गई। भगवान कृष्ण को माखन, मिश्री, मिठाई, पंचामृत आदि पकवान अर्पित कर भोग लगाया। घरों में छोटे-छोटे बच्चों को कृष्ण व राधा की तरह सजाया गया।
जेके मंदिर, सनातन मंदिर कौशलपुरी, राधा माधव मंदिर, इस्कॉन मंदिर आदि में भगवान का भव्य शृंगार कर महाआरती की गई। जेके मंदिर, इस्कॉन मंदिर के भक्तों को यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन कराए गए।
इस्कॉन मंदिर में 125 कलश से भगवान का अभिषेक किया गया। जेके मंदिर में शाम को धूप आरती कर भगवान को भोग अर्पित किया गया। आधी रात भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। ऑनलाइन माध्यम से मंदिर के कार्यक्रम में भक्त शामिल हुए। लोगों ने उन्हें जल, दूध, गाय का घी, दही, शहद, गुलाब जल और फिर जल से स्नान कराने के बाद चंदन का लेप लगाया।