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इत्रनगरी: अखिलेश यादव के नाम दर्ज है लोहिया, शीला और मुलायम से भी बड़ी जीत, मिले थे इतने वोट

Tue, 09 Apr 2024 06:19 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

अपने दूसरे चुनाव में अखिलेश यादव ने तीन लाख से ज्यादा वोट से जीत हासिल की थी। दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित भी जीत के मामले में अखिलेश यादव से पीछे रही हैं।
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वर्ष 2000 में अपने पहले चुनाव के दौरान अखिलेश यादव का तिलक करतीं महिलाएं - फोटो : आर्काइव
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विस्तार
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इत्रनगरी में समाजवाद का बीज बोने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया हों या खुद समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव। लोकसभा चुनाव में यहां से जीत हासिल करने के लिए मिले वोटों में इन दोनों ही नेताओं से अखिलेश यादव को बड़ी जीत हासिल हुई है। दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित भी जीत के मामले में अखिलेश यादव से पीछे रही हैं।

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कन्नौज में हैट्रिक लगाकर सांसद रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार दो बार एक लाख से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल कर चुके हैं। वर्ष 2004 के चुनाव में वह 307373 वोट के बड़े अंतर से जीते थे। जो कि इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत है। उस चुनाव में कुल पड़े 758627 वोट में से उन्होंने करीब 62 फीसदी के साथ 464367 वोट हासिल किया था। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे बसपा के राजेश सिंह को 20 फीसदी के साथ 156994 वोट मिले थे। वोटों के अंतर से यह इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत है। न तो उसके पहले और न ही उसके बाद कोई इतने बड़े अंतर से यहां से निर्वाचित हुआ है।

यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। वोटों के अंतर से इतनी बड़ी जीत यहां के पहले सांसद रहे डॉ. राम मनोहर लोहिया को भी नहीं मिली थी। न ही उनके बाद शाीला दीक्षित या मुलायम सिंह यादव को इतनी बड़ी जीत मिली। डॉ. राम मनोहर लोहिया यहां एक प्रतिशत से भी अंतर से जीते थे। वर्ष 1984 में यहां से एक बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस की दिग्गज नेता रहीं शीला दीक्षित 41.44 फीसदी यानी 199621 वोट पाकर जीती थीं। उनकी जीत का अंतर 62 हजार वोट था। 1999 में मुलायम सिंह यादव 42.63 फीसदी यानी 291617 वोट हासिल कर सांसद बने थे। उनकी जीत का अंतर करीब 79139 वोट था।

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इन नेताओं ने हासिल किए 40 फीसदी से ज्यादा वोट
- 1971 में कांग्रेस के सत्य नारायण मिश्र को 40.91 फीसदी
- 1984 में कांग्रेस से शीला दीक्षित को 41.44 फीसदी
- 1989 में जनता दल से छोटे सिंह यादव को 41.92 फीसदी
- 1998 में सपा के प्रदीप यादव को 42 फीसदी
- 1999 में सपा से मुलायम सिंह यादव को 42.63 फीसदी
- 2009 में सपा से अखिलेश यादव को 44 फीसदी
- 2014 में सपा की डिंपल यादव को 44 फीसदी
- 2019 में भाजपा के सुब्रत पाठक को 49.35 फीसदी

प्रतिशत के नजरिए से रामप्रकाश त्रिपाठी के नाम है सबसे बड़ी जीत
वोटों के अंतर से तो सबसे बड़ी जीत अखिलेश यादव के नाम है, जबकि प्रतिशत के नजरिए से यहां सबसे बड़ी जीत रामप्रकाशत त्रिपाठी के नाम दर्ज है। पहले जनसंघ और बाद में भाजपा के कद्दावर नेता रहे रामप्रकाश त्रिपाठी आपातकाल के बाद हुए 1967 के जनता लहर के दौरान हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर लड़कर सांसद बने थे। उस चुनाव में उन्हें 287612 वोट मिले थे। जोकि कुल वोटों का 69.93 फीसदी था। कांग्रेस विरोधी लहर के दौरान उन्हें एकतरफा जीत मिली थी। उस चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बलराम सिंह यादव को 28.34 फीसदी के साथ कुल 116570 वोट मिले थे। जीत-हार का अंतर 171042 प्रतिशत था।

दो ही बार सांसद फर्स्ट डिवीजन पास
- वर्ष 1971 में रामप्रकाश त्रिपाठी 69.93 फीसदी वोट
- वर्ष 2004 में अखिलेश यादव 62 फीसदी वोट

इत्रनगरी की तीन सबसे बड़ी जीत
- वर्ष 2004 में सपा के अखिलेश यादव ने बसपा के राजेश सिंह को 307373 वोट के बड़े अंतर से हराया।
- वर्ष 1971 में बीएलडी के रामप्रकाश त्रिपाठी ने कांग्रेस के बलराम सिंह यादव को 171042 वोट से हराया
- वर्ष 2009 में सपा के अखिलेश यादव ने बसपा के डॉ. महेशचंद्र वर्मा को 115864 वोटों से हराया
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पिछले चुनाव में सुब्रत-डिंपल ने पार किया पांच लाख का आंकड़ा
वर्ष 2019 के लोसभा चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि विजेता और उपविजेता दोनों ही उम्मीदवार ने पांच लाख वोटों का आंकड़ा पार कर लिया। पहली बार किसी चुनाव में किसी उम्मीदवार को पांच लाख से ज्यादा वोट हासिल हुए। चुनाव जीतने वाले भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक को 563087 वोट और चुनाव हारने वालीं सपा की डिंपल यादव को 550734 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत-हार का अंतर करीब एक प्रतिशत वोटों का था।
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