कानपुर देहात/रसूलाबाद। विस्तृत क्षेत्र वाली इटैली झील में ईको पर्यटन की संभावनाएं हैं। झील सुंदरीकरण के लिए बुधवार को वन विभाग की टीम ने सर्वे किया। अब सुधार कार्यों के लिए डीपीआर बनाई जाएगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव, लखनऊ की मंजूरी के बाद सुधार कार्य होंगे।
रसूलाबाद के औनहा में इंदिरा गांधी वन चेतना केंद्र बना है। इसी के पास ही इटैली झील है। वन विभाग की ओर से करीब पंद्रह वर्ष पूर्व वन चेतना केंद्र को पर्यटन के लिए विकसित किया था, लेकिन बाद में बजट आदि न मिलने से देखरेख नहीं हो सकी और वन चेतना केंद्र की हरियाली गुम हो गई। यहां बने झूले, बैठने के लिए मेज आदि भी क्षतिग्रस्त हो गई।
अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव की ओर से वेट लैंड के विकास और इसे ईको पर्यटन के तौर पर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने डीएफओ से जिले में स्थिति झीलों के विकास के प्रस्ताव मांगे हैं। इसी क्रम में बुधवार को वन रेंजर अरविंद शुक्ला, वन दरोगा मोहित श्रीवास्तव, सुघर सिंह व दिनेश सिंह आदि ने स्वतंत्र इंजीनियर अखिलेश के साथ करीब सात किमी दायरे में फैली इटैली झील का सर्वे किया।
इसके साथ ही इटैली, उसरिया, पीपलखेड़ा, भगवंतपुर, औनहा की ओर से भी झील को देखा। डीएफओ एके द्विवेदी ने बताया कि इटैली झील के पास ही इंदिरा गांधी वन चेतना केंद्र है। झील के विकास से वन चेतना केंद्र का भी महत्व बढ़ेगा। मघई झील के विकास के लिए भी प्रस्ताव बनाया जाएगा। इसको लेकर सर्वे जल्द होगा।