इसके साथ ही बिल्डर विजय सरावगी, वीरेंद्र राय, संजय अरोड़ा, शिवा सोनी, मयंक गर्ग के कार्यालयों, आवास व प्रतिष्ठानों समेत 25 जगहों पर कार्रवाई की गई थी। सूत्रों के अनुसार इनसे जुड़े तमाम लोगों के बैंक खाते मिले हैं। बड़े स्तर पर लेनदेन हुआ है। इसके अलावा जमीनों, फ्लैट आदि की बिक्री में नकदी ली गई। नकदी किससे ली गई और कहां खपाई गई, इसकी भी जांच की जा रही है। वहीं इनसे जुड़ा सीए दिनेश सेठी अभी भी फरार हो गया है। इसके घर पर ताला पड़ा है। अब विधिक प्रक्रिया के तहत ताला तोड़कर जांच-पड़ताल की तैयारी है।
स्काई टॉवर तनता गया, आय का स्रोत नहीं दिखाया
घनाराम ग्रुप 20 साल से ज्यादा से सरकारी ठेकों पर बांध बनाने और मरम्मत का काम करते आ रहा है। इसके साथ ही अब झांसी में बड़ा मॉल, टॉवर बना रहा है। स्काई टॉवर लगभग बनकर तैयार है। इसके बाद भी इन लोगों ने आय का स्रोत नहीं दिखाया। बहुमंजिला टॉवर में सैकड़ों फ्लैट हैं। इनकी बिक्री भी की जा रही है। ग्राहकों से चेक के साथ ही नकदी ली जा रही है।
जमीनों की खरीद के लिए कहां से आया रुपया
सूत्रों ने बताया कि ग्रुप की ओर से सात साल में की गई जमीनों की खरीद-बिक्री की जांच की जा रही है। इनके झांसी में ही छह प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कई सौ करोड़ का निवेश है। यह निवेश कहां से आया, कितने लोगों का पैसा लगा है, इनकी आय का स्रोत क्या है, इसकी जांच अफसरों ने शुरू कर दी है।
दूसरों को देने वाले ठेकों में फर्जी बिलिंग
ग्रुप जो भी सरकारी ठेका लेता था, उसके कुछ काम दूसरे ठेकेदारों से कराना दिखाता था। हालांकि यह केवल कागजों में ही सीमित था। इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी बिलिंग मिली है। इससे सब कॉन्टैक्ट की जांच की जा रही है। कितनी फर्मों को काम दिखाया और कितना भुगतान किया। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।