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International Museum Day: सात साल से शुभारंभ की राह तक रहा म्यूजियम, यहां मौजूद हैं सदियों पुरानी मूर्तियां

Thu, 18 May 2023 05:27 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

कन्नौज के सुनहरे इतिहास को सहेजे राजकीय म्यूजियम का सात साल में भी शुभारंभ नहीं किया जा सका। तीन मंजिला म्यूजियम में खुदाई में निकलीं सदियों पुरानी और महत्वपूण मूर्तियां रखी गई हैं।
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राजकीय पुरातत्व संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इत्र और इतिहास की नगरी कहे जाने वाले कन्नौज ने अपनी विरासत को खूबसूरती से सहेज रखा है। यहां के सदियों पुराने इतिहास को संजोए रखने के लिए तीन मंजिला म्यूजियम की इमारत में रखा गया है। यह अलग बात है कि पिछले सात साल से बनकर तैयार म्यूजियम की इमारत को अब तक शुरू नहीं किया जा सका है। इसके उद्घाटन की राह तकते हुए दो स्टाफ में एक सेवानिवृत्त हो गया और दूसरे का निधन हो गया।

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जीटी रोड किनारे यूपीटी के पास बने तीन मंजिला म्यूजियम की पहली मंजिल पर अलग-अलग गैलरी है। दूसरी मंजिल पर कन्नौज शहर में अलग-अलग समय में खुदाई के दौरान निकली सदियों पुरानी मूर्तियों को सहेज कर रखा गया। तीसरी मंजिल पर इत्र बनाने की जानकारी को मूर्तिकला के माध्यम से अनोखे अंदाज में समझाने के लिए अलग से गैलरी बनाई गई। इसी मंजिल पर कन्नौज के राजवंशों के शासनकाल को मूर्तिकला के माध्यम से दिखाया गया है। सम्राट हर्षवर्द्धन के शासनकाल के साथ ही राजा जयचंद के शासन को भी दिखाया गया है।

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कन्नौज पर मोहम्मद गौरी के आक्रमण और बुंदेलखंड के बहादुर योद्धा आल्हा-ऊदल के यहां के प्रवास को भी दिखाया गया है। हालांकि औपचारिक रूप से म्यूजियम को अब तक शुरू नहीं किया जा सका है, लेकिन रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। इसमें बड़ी संख्या में छात्र होते हैं, जो शहर और जिले के इतिहास को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन औपचारिक रूप से म्यूजियम का अब तक उद्घाटन न होने की वजह कर कई बुनियादियों सुविधाओं की कमी से उन्हें मायूसी होती है।

सम्राट हर्षवर्द्धन और चीनी दार्शनिक ह्वेनसांग की मूर्तियां पर्दे में
म्यूजियम को भव्य बनाने के लिए यहां बाहरी हिस्से में कन्नौज के यशस्वी शासक रहे सम्राट हर्षवर्द्घन की आदमकद मूर्ति लगाई है। पास ही में चीनी दार्शनिक व बौद्घ भिक्षु ह्वेन त्सांग की भी आदमकद मूर्ति खड़ी है। सम्राट हर्षवर्द्घन के शासनकाल सन् 590 से 647 के बीच कन्नौज काफी संपन्न साम्राज्य में शुमार था। उनके ही शासनकाल के दौरान चीनी दार्शनिक ह्वेन सांग 622 में भारत भ्रमण के दौरान यहां आए थे। सम्राट हर्षवर्द्धन के सेवाभाव से प्रभावित होकर वह काफी दिनों तक यहां रुके थे। यहां से वापस लौटने के बाद उन्होंने किताब ‘सी-यू-की’ में कन्नौज का खास जिक्र किया है। ऐसे में म्यूजियम में इन दोनों की मूर्तियों को लगवाकर सुनहरे इतिहास से लोगों को रूबरू कराने की कोशिश की गई थी।

उद्घाटन की हसरत संग दुनिया से रुख्सत राजकीय संग्रहालय बनने पर शासन की ओर से यहां संस्कृति विभाग की ओर से बाकायदा स्टाफ की तैनाती की गई थी। संग्राहलय के अध्यक्ष के रूप में दीपक कुमार ने यहां अपनी सेवा दी। संग्राहलय के बनने और इसके सजने-संवरने में उनकी खासी भूमिका रही। उनकी ओर से इसके उद्घाटन की कोशिश की गई पर कामयाबी नहीं मिली। इसे शुरू होने की हसरत लिए ही इसी साल 17 जनवरी को उनका निधन हो गया। उनके बदले में शासन ने लखनऊ में तैनात डॉ. विनय सिंह को पिछले महीने अप्रैल से यहां का अतिरिक्त प्रभार दिया है। यहां गैलरी असिस्टेंट के पद पर रहे प्रदीप कुमार पिछले साल 30 जून को रिटायर हो चुके हैं। उनकी जगह पर शासन ने रामपुर से यहां अरविंद सिंह को यहां तैनात किया है। इसी साल 15 मार्च से यहां उत्तर प्रदेश सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से छह पूर्व सैनिकों को सुरक्षा के तहत तैनात किया गया है। हालांकि म्यूजियम के संचालन की औपचारिक शुरुआत नहीं हो सकी है। म्यूजियम के नए स्टाफ का कहना है कि उर्घाटन होने पर यहां सुविधाएं बढ़ेंगी। यहां आने वाले पर्यटकों से न्यूनतम फीस लिया जा सकेगा। राजस्व भी बढ़ेगा।
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सपा शासन में हुआ कायाकल्प
कन्नौज के इतिहास को सहेजने के लिए सपा शासन के दौरान म्यूजियम बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शासनकाल में इस इमारत का शिलान्यास किया था। कन्नौज का सांसद रहते हुए अखिलेश यादव ने भी इसमें दिलचस्पी ली। बाद में वह मुख्यमंत्री बने तो अलग से बजट जारी कर म्यूजियम की इमारत को नए सिरे से बनवाया गया। शासन से अलग से बजट जारी कर इसके तीनों मंजिल को अलग-अलग अंदाज में तैयार किया गया।
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