पोस्टमार्टम के लिए भी वाहन जुटाने पड़ते हैं
प्राय: देखा जाता है कि कई बार पुलिस को शव के पोस्टमार्टम के लिए वाहन जुटाने पड़ते हैं। इस व्यवस्था को उचित मुकाम देने में कहीं न कहीं अनदेखी हो रही है। शासन स्तर से स्वास्थ्य विभाग को मजबूती देने के लिए जोर आजमाइश की जा रही है। शव वाहनों में इजाफे की जरूरत पर ध्यान कराती यह घटना बहुत कुछ कह रही है।
वाहन का इंतजार दूसरी ओर शव देख परिजन का टूटता साहस
अस्पताल में घर के एक सदस्य की मौत हो जाने की जानकारी जैसे ही परिजन को लगती है। चीख पुकार से अस्पताल गूंज उठता है। बेसुध होते परिजन दूसरी ओर रिश्तेदारों की मौजूदगी में वाहन का इंतजार। जिला अस्पताल से संपर्क कर वाहन बुलाने में कितना समय लगेगा यह दूरी पर निर्भर करता है। ऐसे में शव को अस्पताल में कितनी देर तक रखा जाता। वाहन का इंतजाम स्वयं से करने की जद्दोजहद चलती। इसी के चलते बाइक से शव घर ले जाने के दृश्य सामने आते हैं।
बहन का शव पीठ पर बांधकर बाइक से ले गया युवक
पानी गर्म करने के लिए बाल्टी में डाली गई रॉड छू जाने से एक युवती को करंट लग गया। परिजन की नजर पड़ने पर उसे बेसुध हालत में सीएचसी ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने युवती को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जो हुआ उसे सीएचसी परिसर में मौजूद लोग एक टक देखते रहे। मृत युवती का शव घर ले जाने के लिए भाई ने बाइक संभाली। दूसरी बहन पीछे बैठी। बीच में मृत बहन का शव भाई ने दुपट्टे से पीठ पर बांधा।
पानी गर्म करने के लिए कमरे में गई थी अंजलि
इसके बाद घर के लिए रवाना हुए। तकरीबन 15 मिनट तक हर किसी की निगाहें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी रहीं। मंगलवार को बाबूराम मोहनलाल महाविद्यालय के पास नवीन बस्ती पश्चिमी निवासी प्रबल प्रताप सिंह की पुत्री अंजलि (20) नहाने के लिए पानी गर्म करने के लिए कमरे में गई, जहां बाल्टी में इलेक्ट्रानिक रॉड डाल रही थी। इसी दौरान वह करंट की चपेट में आ गई।
एम्बुलेंस की ओर से परिजन का ध्यान ही नहीं गया
परिजन ने जब बाल्टी समीप अंजलि को पड़ा देखा, तो उसे लेकर सीएचसी पहुंचे। यहां मौजूद चिकित्सक ने अंजलि को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन बिलख पड़े। डॉक्टर से बिना पोस्टमार्टम के शव घर ले जाने की बात कहकर बाहर निकले। अंजलि के भाई आयुष, पिता प्रबल व दूसरी बहन बाइक से थे। अंजलि की मौत ने इतना झकझोरा कि एम्बुलेंस की ओर से परिजन का ध्यान ही नहीं गया।
हर किसी की निगाहें बाइक पर टिकी रहीं
किसी ने एम्बुलेंस व्यवस्था होने को लेकर शायद ही ध्यान दिलाया हो। आयुष बाइक पर बैठा। दूसरी बहन पीछे बैठी। बीच में पिता ने अंजलि का शव रखा। संतुलन न बिगड़े इसके लिए दुपट्टे से अंजलि का शव भाई आयुष ने पीठ पर बांध लिया। तकरीबन 15 से 20 मिनट तक यह सब सीएचसी परिसर में चलता रहा। हर किसी की निगाहें बाइक पर टिकी रहीं।
परिजन यदि वाहन की मांग करते तो मुहैया कराया जाता
इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. अभिचल पांडेय ने बताया कि यदि कोई कोई केस मृत्यु हालत में अस्पताल आता है तो परिजन अपने वाहन से घर ले जाते हैं। अगर कोई वाहन नहीं होता है, तो वाहन 100 शैया अस्पताल से मंगाकर कर शव घर भेजा जाता है। बाइक पर शव ले जाने के संबंध में जानकारी नहीं है। अगर कोई ऐसा मामला है तो जो जानकारी की जाएगी। परिजन यदि वाहन की मांग करते तो मुहैया कराया जाता।