कानपुर में पकड़े गए तीन अवैध टेलीफोन एक्सचेंज की जांच कर रही एटीएस को जानकारी मिली है कि जितने सिम बरामद किए गए, उनमें से कई में एक ही व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। एक ही आधार या दस्तावेज पर दस-दस सिम जारी किए गए और उन्हें इस अवैध एक्सचेंज नेटवर्क कर पहुंचाया गया। सूत्रों का कहना है कि प्री एक्टिवेडेट सिम की वजह से ही यह एक्सचेंज का धंधा फल-फूल रहा था।
ज्यादातर नंबर से जुड़े आधार व अन्य दस्तावेजों में महाराष्ट्र के अलावा यूपी व बिहार के लोगों के ब्योरे हैं। एटीएस एयरटेल और बीएसएनएल से उन दुकानदारों का डेटा लेकर जांच में सूची बनाने में जुट गई है, जिन्होंने प्री एक्टिवेटेड सिम जारी किए। आधार नंबरों के आधार पर उनके नाम जारी सभी सिमों का डेटा जुटाकर यह देखा जाएगा कि आधार व अन्य दस्तावेजों के असली मालिकों ने कोई सिम इश्यू कराया, जिसके बहाने इस नेटवर्क ने अवैध तरीके से और सिम जारी कर लिए या दस्तावेज धारक भी पैसे लेकर सिम के लिए अपनी जानकारी इस नेटवर्क के साथ साझा करते थे। इस नेटवर्क को तोड़ने से भविष्य में और पनपने वाले अवैध एक्सचेंज के गोरखधंधे पर भी नकेल कसने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल मुंबई से कानपुर में तीन एक्सचेंज नियंत्रित करने वाला मुख्य सरगना अभी भी फरार है।