आईआईटी में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) के स्टूडेंट अरुण कुमार ने सोमवार सुबह दोनों हाथों की नसें काटकर और जहरीला केमिकल पीकर जान देने की कोशिश की। हॉस्टल के अन्य छात्रों ने उसे लहूलुहान देखकर आईआईटी प्रशासन को जानकारी दी और फिर उसे रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया।
वहां प्लास्टिक सर्जन ने दोनों हाथों का ऑपरेशन करके उसकी जिंदगी बचाई। रीजेंसी के चिकित्सा अधीक्षक ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अरुण के सहपाठियों का कहना है कि डिप्रेशन में आकर उसने ऐसा कदम उठाया। इस मामले में आईआईटी प्रशासन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। अरुण कहां का रहने वाला है, यह पता नहीं चल सका।
सूत्रों के अनुसार अरुण कुमार (28) ने तड़के हॉस्टल में स्थित रूम में ब्लेड से अपने दोनों हाथों की नसें काट लीं और कोई केमिकल पी लिया। थोड़ी देर बाद उसकी चीखें सुनकर हॉस्टल के अन्य कमरों से स्टूडेंट भागकर उसके कमरे में पहुंचे तो देखा कमरे में अरुण लहूलुहान पड़ा था। अरुण ने साथियों को जहरीला केमिकल पीने की भी बात बताई। साथी उसे तुरंत आईआईटी के हेल्थ सेंटर ले गए।
वहां प्राथमिक उपचार के बाद सहपाठी लीलाधर आदि उसे सुबह सात बजे रीजेंसी हास्पिटल ले गए और भर्ती कराया। रीजेंसी में डॉ. गुलाटी ने ऑपरेशन कर उसके दोनों हाथों की नसें जोड़ीं। रीजेंसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि जहरीला पदार्थ खाने की बात सामने आने पर अरुण की इंडोस्कोपी कराई गई। अब उसकी हालत खतरे से बाहर है। वह जनरल वार्ड नंबर तीन के बेड नंबर 813 पर भर्ती है।
वहीं आईआईटी हेल्थ सेंटर के सीएमओ डॉ. राजीव जायक ने बताया कि अरुण ने तड़के दोनों हाथों की नसें काट ली थीं। गंभीर हालत में उसे हेल्थ सेंटर लाया गया था। अब रीजेंसी में उसका इलाज हो रहा है। होश में आने पर उससे वजह समेत अन्य जानकारियां की जाएंगी। हॉस्टल में उसके आसपास के कमरों में रह रहे छात्रों का कहना है कि वह तनाव में था। मामले की सूचना अरुण के परिवार वालों को दे दी गई है।