आईसीसीटी इंडिया के प्रमुख अनूप बांदिवडेकर ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए हमें सौर ऊर्जा पर ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन आसानी से हो सकेगा।
अभी से अगर देश में कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण करना शुरू किया गया तो वर्ष 2040 तक असमय होने वाली मौतों की संख्या में काफी गिरावट आएगी। इस नकेल से जलवायु शुद्ध होगी और सांस संबंधी बीमारियों पर भी लगाम कसी जा सकेगी।
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आईआईटी कानपुर और इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) के शोधकर्ताओं के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में वाहन, बिजली क्षेत्र में उत्सर्जन, वायु गुणवत्ता, समय से पहले मृत्यु दर, मजबूत बिजली क्षेत्र उत्सर्जन नियंत्रण, डीकार्बोनाइजेशन रणनीतियों के साथ और बिना और स्वास्थ्य क्षति से बचने का अनुमान लगाया है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण से 2040 तक देश में 70380 लोगों की असमय मौतें बचाई जा सकती हैं। आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य हैं। इनके उपयोग से 2040 तक पर्यावरण भी बेहतर हो सकता है।
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आईसीसीटी इंडिया के प्रमुख अनूप बांदिवडेकर ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए हमें सौर ऊर्जा पर ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन आसानी से हो सकेगा। बता दें कि आईसीसीटी एक स्वतंत्र गैर लाभकारी संगठन है। इसकी स्थापना पर्यावरण नियामकों को निष्पक्ष अनुसंधान, तकनीकी और वैज्ञानिक विश्लेषण देने के लिए की गई है।