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वतन से मोहब्बत है तो इसका इजहार भी करना चाहिए, बड़ी कुर्बानियां देकर आजादी हासिल की है- कारी ताहिर

Sat, 17 Aug 2019 09:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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दुआ मांग आजादी का जश्न मनाती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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दारुल उलूम देवबंद में इस बार जश्न-ए-आजादी, समारोह पूर्वक मनाए जाने को मुस्लिम धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों ने अनुकरणीय बताया। हालांकि उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है ऐसा निरंतर होता चला आ रहा है। उल्मा-ए-कराम की साझा राय है कि आजादी की जंग में उलमा-ए-देवबंद का किरदार शानदार रहा।
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उन्होंने बड़ी कुर्बानियां देकर आजादी हासिल की है, इस लिए आजादी का जश्र मनाया जाना जायज है। जमीअत उलमा-ए-हिंद के जिलाध्यक्ष कारी ताहिर बेग ने कहा कि मौलाना अरशद मदनी हमारे रहनुमा हैं। दारुल उलूम देवबंद में राष्ट्रगान होना एक अच्छी पहल है। वतन से मोहब्बत के साथ ही इसका इजहार भी करना चाहिए।

 

दारुल उलूम देवबंद में आजादी के जश्न को दीनी जानकारों ने सराहा

मस्जिद कुरैशियान के इमाम-ए-जुमा मुफ्ती नजीब कासमी ने कहा कि देबवंद में जश्न-ए-आजादी काफी पहले से मनाया जा रहा है। इस बार समारोह और राष्ट्रगान को लेकर जो पहल की गई है, वह सराहनीय है। इसमें हमारी नई नस्ल आजादी की अहमियत पहचान सकेगी। कहा कि ऐसे मौकों पर इस तरह के आयोजन कर हमें बताना चाहिए कि किस तरह धार्मिक मतभेद भूल कर हम सब देशवासियों ने एकजुट होकर अंग्रेजों से लोहा लिया था।

जामिया हामीदुल मदारिस के प्रधानाचार्य मौलाना डॉ. जफर अब्बास ने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर जश्न ए आजादी में मुसलमान हमेशा से शरीक रहे हैं। भारत में तमाम मदरसे शुरू से ही आजादी का जश्न मनाते रहे हैं। कहा कि पहली बार किसी मदरसे ने जश्न ए आजादी मनाया, ये धारणा गलत है, ऐसा निरंतर होता आ रहा है।

 
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कहा, आजादी की जंग में उलमा-ए-कराम का किरदार रहा शानदान 

कहा कि सन 1988 में जब वह मदरसा सुल्तानुल मदारिस में अध्ययनरत थे, तब भी ध्वजारोहण और देश भक्ति के गीत गाए जाते थे और देवबंद समेत मदरसों में ये सिलसिला तब भी चलता था। देहलिया स्थित मदरसा मा अहद उम्मुल कुरा के प्रबंधक मौलाना अबुल्लैस नदवी ने कहा कि ध्वजारोहण और राष्ट्रगान वतन से मोहब्बत का इजहार करते हैं।

दारुल उलूम देबवंद में राष्ट्रगान का गाया जाना अच्छी पहल है। हालांकि दारुल उलूम और नदवतुल उलमा लखनऊ में ध्वजारोहण व वतन के नगमे हमेशा से ही गाए जाते रहे हैं। गोपामऊ स्थित दरगाह दादा मियां में संचालित मदरसे के प्रबंधक मौलाना अबुर्रहमान जामई ने कहा कि ध्वजारोहण, राष्ट्रगान या वतन परस्ती के नगमे गाना वतन से मोहब्बत की पहचान है।

तमाम मदरसों को आजादी के जश्न में परचम कुशाई करनी चाहिए व राष्ट्रगान गाना चाहिए। हरदोई शहर के युवा आलिम-ए-दीन मुफ्ती शहाबुद्दीन ने कहा कि देश के मदरसों में हमेशा राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते रहे हैं, देवबंद में इस बार यह बड़े पैमाने पर मनाया गया, जो कि अच्छी पहल है।
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