सऊदी अरब से लौटने के बाद आपबीती सुनाते युवक
- फोटो : अमर उजाला
सऊदी अरब के रियाद शहर में पांच माह तक फंसे रहे जिले के तीन युवक लौटे तो उन्होंने अपनी आपबीती बताई। वहां 20 दिन उनको सड़क पर सोना पड़ा। रुपये न होने पर पेट भरने के लिए उन्हें भीख मांगनी पड़ी। जिस कंपनी में काम करने के लिए गए थे उसके मालिक ने सुनसान जगह पर एक कमरे में कई दिन तक बंधक बनाकर भी रखा।
हालांकि विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप पर उन्हें 13 अगस्त को सुरक्षित घर भेज दिया गया। सऊदी से लौटे युवकों ने कहा कि अब वह गांव में मजदूरी कर लेंगे, लेकिन विदेश नहीं जाएंगे। माखी थानाक्षेत्र के गिरवरखेड़ा निवासी सचिन कुमार पुत्र रामप्रसाद अपने बहनोई प्रमोद पुत्र रामसहाय निवासी पिंडोखा थाना गंगाघाट व अचलगंज के उम्मेदखेड़ा निवासी ममेरेे भाई राहुल कुमार पुत्र मुनई के साथ 17 मार्च 2019 को सऊदी के रियाद शहर में काम करने गए थे।
सदर विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने विदेश मंत्रालय से किया था संपर्क
सदर विधायक पंकज गुप्ता के साथ में मौजूद सऊदी अरब से लौटे तीनों युवक।
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रिश्ते में मामा के लड़के जगतपाल ने तीनों को सऊदी में तीस हजार रुपये प्रतिमाह दिलाने का वादा करते हुए बुलाया था। सचिन ने बताया कि जिस दिन वह रियाद शहर पहुंचे थे उन्हें उस कमरे में रखा गया जहां पहले से 50 लोग रह रहे थे। काम के नाम पर उन्हें एक सप्ताह बाद एक बंद पड़ी केमिकल फैक्टरी में टैंक साफ करवाए गए।
एक सप्ताह तक काम करने के बाद केमिकल की वजह से जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो उन्होंने काम करने से इन्कार कर दिया था। ऐसे में ठेकेदार ने उनसे कमरा खाली करा लिया। इस पर उन्हें 20 दिन तक सड़क पर ही रहना पड़ा। उनके पास रुपये भी नहीं थे। ऐसे में उन्हें मांगकर अपना पेट भरना पड़ा। राहुल ने बताया कि पांच माह में उन्हें जितनी यातनाएं झेलनी पड़ी वह किसी नरक से कम नहीं थी।
उन्होंने जब वापस भेजने की बात की तो ठेकेदार ने उन्हें रियाद से सौ किलोमीटर दूर एक सुनसान स्थान पर भेज दिया था। एक सप्ताह तक उन्हें वहां कमरे में बंदकर रखा गया। इस बीच उन्होंने मैनपुरी में रहने वाले युवकों की मदद से एक वीडियो वायरल किया। परिजनों को जब जानकारी हुई तो उन्होंने सदर विधायक पंकज गुप्ता और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित से मदद मांगी थी।
सदर विधायक ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। जिसके बाद सऊदी स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने तीनों युवकों को खोज निकाला और उन्हें छुड़ाया। मुंबई की जिस कंपनी के माध्यम से तीनों युवक सऊदी अरब गए थे उसी कंपनी ने फ्लाइट का टिकट बुक कराया और 15 अगस्त की सुबह वह अपने घर पहुंच गए थे।
शनिवार को तीनों युवकों के परिजनों ने सदर विधायक पंकज गुप्ता से मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया। तीनों युवकों ने कहा कि वह तीस हजार रुपये के लालच में विदेश में काम करने गए थे। वहां से सुरक्षित लौटने के बाद अब वह गांव में ही मजदूरी या कोई दूसरा काम करना पसंद करेंगेे लेकिन अब विदेश नहीं जाएंगे।
खेत गिरवी रखा, ब्याज पर लिए रुपये
माखी के गिरवरखेड़ा निवासी सचिन ने विदेश जाने के लिए 1.50 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। जबकि प्रमोद व राहुल ने खेत गिरवी रख रुपये का इंतजाम किया था। तीनों युवकों को उम्मीद थी कि विदेश में काम करने से जो रुपये उन्हें मिलेंगे उससे वह गिरवी पड़े खेत छुड़ा लेेेंगे लेकिन हालांकि पंच माह में उन्हें सिर्फ पांच हजार रुपये ही मिले। सचिन के परिजनों ने बताया कि उनका बेटा सुरक्षित आ गया है। अब वह मजदूरी कर ब्याज पर लिए गए रुपये को चुका देंगे।