रोडवेज प्रबंधन ने अपने ड्राइवरों को सुधारने के लिए एक सख्त मुहिम शुरू की है। इसके तहत अगर ड्राइवर कहीं भी बसों को खड़ा करते हैं या बिना स्टॉपेज यात्रियों को बैठाते और उतारते हैं तो उन्हें भारी पड़ेगा। इन गतिविधियों के चलते ट्रैफिक पुलिस ने बसों का चालान काटा तो इसकी रकम रोडवेज नहीं भरेगा, बल्कि इसे ड्राइवरों के वेतन से काटा जाएगा।
आमतौर पर बसों को रुकवाने के जिम्मेदार कंडक्टर होते हैं पर यह मुहिम शुरू होने के बाद ड्राइवर उनकी नहीं सुनेगा। इस तरह की कार्रवाई के लिए सभी चालकों को सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों के माध्यम से सूचना भी दे दी गई है।
रोडवेज अफसरों का मानना है कि 25 फीसदी चालक बेतुके तरीके से सवारियों के चक्कर में चौराहों पर बसें खड़ी कर देते हैं। कई बार पार्किंग में बसें खड़ी करके ड्राइवर और कंडक्टर इधर-उधर हो जाते हैं। इन्हीं अव्यवस्थाओं की वजह से झकरकटी बस अड्डे के सामने भी जाम लगता है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि जब चालकों की पगार से चालान राशि की कटौती होगी तो इनकी अराजकता पर अंकुश लगेगा। इस नई व्यवस्था को 17 जनवरी से प्रभावी किया जाएगा। परिवहन निगम की बसों की वजह से चालक कई बार बसों की गलत जगह पार्किंग करते हैं। चालान राशि उन्हीं के वेतन से कटेगी तो इस पर अंकुश लगेगा।