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डीएम के तेवर सख्त तो नुकसान का सर्वे करने पहुंचे अफसर

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गंगरौली गांव में ओलावृष्टि से फसल नुकसान का सर्वे करते कृषि कर्मी। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का सर्वे न करने पर डीएम ने सख्त तेवर दिखाए तो कृषि विभाग के अधिकारी हरकत में आए। सोमवार को अफसर व कर्मियों ने ओलावृष्टि प्रभावित गांवों का दौरा शुरू कर दिया। डीएम ने जल्द ही सर्वे कर रिपोर्ट मांगी है।
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तीन जनवरी को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश व ओलावृष्टि से राजपुर, सिकंदरा व सरवनखेड़ा क्षेत्र के 41 से अधिक गांवों में चना, मसूर, मटर, आलू, गेहूं, सरसों सहित अन्य फसल बर्बाद हो गई है। सबसे अधिक नुकसान सरसों व चने की फसल को हुआ है। इसके बावजूद अफसरों ने राजस्व, कृषि व बीमा कंपनी की संयुक्त टीम बनाकर नुकसान का फौरी सर्वे कराने का दावा करते हुए खानापूरी कर दी थी, लेकिन नुकसान के तीन दिन बीतने के बाद भी अफसर व कर्मी तबाही का मंजर देखने गांवों में नहीं पहुंचे।
सोमवार को अमर उजाला ने किसानों की परेशानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। जिसका संज्ञान लेते हुए डीएम ने कृषि अधिकारियों को तलब किया। इसके बाद कृषि कर्मियों की टीमें फसल प्रभावित गांवों के लिए निकली। सोमवार को राजपुर क्षेत्र के गिरदौं, इंगबारा, दयानतपुर, मुरलीपुर, सरवनखेड़ा क्षेत्र के गंगरौली समेत अन्य गांवों में पहुंचे कर्मियों ने किसानों को मौके पर बुलाकर फसल नुकसान का सर्वे किया।
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- बारिश व ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का सर्वे कार्य तेजी से शुरू करा दिया गया है। कृषि अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
- जितेंद्र प्रताप सिंह (जिलाधिकारी)
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- जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित कर कर्मियों की टीमें ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों में भेजी जा रही हैं। फसल नुकसान की रिपोर्ट जल्द तैयार कर ली जाएगी।
- विनोद कुमार यादव (उपकृषि निदेशक)
ओलावृष्टि से नुकसान के लिए 60 किसानों के व्यक्तिगत दावे
- बारिश और ओलावृष्टि से फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए जिले के केवल 60 किसानों ने ही दावा किया है। सरसों, राई, गेहूं, आलू, मटर, चना समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान राजपुर, सिकंदरा व सरवनखेड़ा क्षेत्र के 41 से अधिक गांवों में फसलों को हुआ है। जिसके बाद जिले के 60 किसानों ने फसल नुकसान को लेकर व्यक्तिगत दावा किया है। उपकृषि निदेशक ने बताया कि अगर किसी ग्राम पंचायत में 50 फीसदी से अधिक क्षेत्रफल प्रभावित होगा तो वहां पर ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे किया जाएगा। इससे कम है तो खेत पर जाकर खतौनी के आधार पर व्यक्तिगत नुकसान का सर्वे किया जाएगा। (संवाद)
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