अपनी ही करतूत में फंसी पुलिस
सीएचसी घाटमपुर से हर्षित को हैलट रिफर किया गया तो उसे बीच रास्ते में लोडर में डालने की क्या जरूरत थी, पुलिस के पास इसका जवाब नहीं है। सीधे मोर्चरी पहुंचने पर वहां तैनात चिकित्सक ने शव लेने से इनकार कर दिया। कहा कि पहले हैलट इमरजेंसी ले जाकर मौत की पुष्टि कराकर शव का पंचनामा भरवाएं। यह प्रक्रिया अपनाने के बाद ही मोर्चरी में शव लिया गया। ऐसे में सवाल यही है कि बिना डॉक्टरों की पुष्टि के पुलिस ने यह कैसे मान लिया कि हर्षित की मौत हो गई।
मामले की जानकारी हुई है। जांच के आदेश दिए गए हैं कि आखिर एंबुलेंस से लोडर में क्यों शिफ्ट किया गया है, जो दोषी होंगे उन पर कार्रवाई होगी।- आदित्य कुमार शुक्ला, एएसपी, कानपुर आउटर