इन रोगियों का बीच-बीच में पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराया जाता है। जांच में पाया गया कि इनके फेफड़े मजबूत हो रहे हैं। इसके साथ ही रोगियों को दूसरे अंगों पर भी सकारात्मक प्रभाव आ रहा है। अंगों की गतिशीलता बढ़ी है। ब्लड प्रेशर सुधर रहा है। रोगियों की सेहत में सुधार शंख न बजाने वालों की तुलना में तेज है।
इसके साथ ही शरीर के मेटोबॉलिज्म में भी सुधार है। कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा ने बताया कि हेल्थ प्रमोशन सेंटर की स्थापना करके हृदय रोगियों को योग और शंख थेरेपी के संबंध में जागरूक किया जाएगा। इसके प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
शंख बजाने से खुल जाती हैं सांस की नलियां
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के इथिकल कमेटी के चेयरमैन प्रोफेसर मीरा अग्निहोत्री का कहना है कि कोरोना संक्रमितों में सांस की दिक्कत बढ़ी थी। शरीर के अंदरूनी रिसाव से सांस की नलिकाएं चिपक गई थीं। इसमें शंख थेरेपी बहुत कारगर साबित हुई। कोरोना के रोगियों के सांस तंत्र में गुणात्मक सुधार हुआ। अब इसे हृदय रोगियों पर आजमाया जा रहा है। शंख बजाने से हृदय की क्रिया तेज होती है। सांस की ट्रेकिया, ब्रोंकिया नलिकाएं चिपकी होती हैं, तो खुल जाती हैं। दूसरे अंदरूनी अंगों के व्यायाम के लिए भी यह कारगर थेरेपी है।
शंख थेरेपी पर वर्ष 2016 में भी शुरू हुआ था शोध
कार्डियोलॉजी में वर्ष 2016 में भी शंख थेरेपी पर शोध शुरू हुआ था। योग थेरेपी के विशेषज्ञ आईएएस अधिकारी डॉ. राजीव शर्मा ने शोध शुरू किया था। टीम में शामिल डॉक्टरों के तबादले के बाद यह अटक गया। बाद में डॉ. शर्मा ने अपने स्तर से शोध करके सही तरह से शंख बजाने की विधि बताई। उन्होंने बताया कि थेरेपी के लिए शंख सही ढंग से बजाना जरूरी है। इससे शरीर के हर अंग का व्यायाम हो जाता है। डॉ. शर्मा ने योग थेरेपी में पीएचडी की है।