लंकाधिपति रावण का नाम आते ही लोगों के मन में प्रभु श्रीराम विरोधी होने के विचार कौंंध जाते हैं लेकिन, यही रावण रोजगार जरिया भी है। रावण के पुतला बनाने का काम लखीमपुर खीरी के एक परिवार की पांचवीं पीढ़ी करती आ रही है। हरदोई जिले के नुमाइश मेला में श्रीरामलीला के मंचन में रावण वध लीला के साथ पुतला दहन भी किया जाता है।
मंगलवार को लखीमपुर खीरी के पलिया के मोहल्ला हलवाई निवासी इंसाफ अली ने अपने पुत्र शावान अली और पौत्र शेहरान अली के साथ रावण के पुतला को अंतिम रुप दिया। यहां पर श्रीरामलीला में केवल रावण के पुतले का ही दहन किया जाता है। इंसाफ अली ने बताया कि उन्होंने रावण, मेघनाथ और कुंभकरण आदि के पुतले बनाने का काम अपने बाबा और पिता फजल रहमान से सीखा है। अब उनके साथ उनका लड़का शावान अली और पौत्र शेहरान अली भी पुतला बनाने के काम में मदद करता है।
वह 12 साल से यहां नुमाइश मेला में पुतला बनाने आ रहे हैं। इस बार भी रावण का पुतला 35 फीट ऊंचाई वाला होगा। इसे तैयार किए जाने में कागज, लकड़ी आदि सामग्री के साथ ही 120 मीटर कपड़ा लगा है। बताया कि एक पुतला बनाने में करीब 8-10 दिन का समय लग जाता है। बताया कि दशहरा पर पुतलों की अधिक मांग रहती है।