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Hardoi: कारोबारी से बने राजनीतिक खिलाड़ी, कोई किचन से पहुंचा कैबिनेट, पढ़ें BJP और SP प्रत्याशी की कहानी

Wed, 10 Apr 2024 10:51 AM IST
हिमांशु अवस्थी आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई

सार

Hardoi News: हरदोई लोकसभा क्षेत्र के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में चुनावी मुकाबला भाजपा प्रत्याशी जय प्रकाश और सपा गठबंधन की प्रत्याशी ऊषा वर्मा के बीच नजर आ रहा है।
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जय प्रकाश और ऊषा वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कहते हैं कि वक्त और तकदीर कब कैसे बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। राजनीति में भी कुछ ऐसा ही होता है। रणनीति का कौशल बेशक महत्वपूर्ण है, लेकिन परिस्थितियां और अवसर की भूमिका भी राजनीति में कम नहीं है। अगर हरदोई लोकसभा क्षेत्र की पिछले लगभग दो दशक की राजनीति पर निगाह दौड़ाई जाए, तो यह बात साबित भी हो जाती है। हरदोई लोकसभा क्षेत्र के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में चुनावी मुकाबला भाजपा प्रत्याशी जय प्रकाश और सपा गठबंधन की प्रत्याशी ऊषा वर्मा के बीच नजर आ रहा है। दोनों ने ही राजनीति में किस तरह से प्रवेश किया था। इसको लेकर पेश है आनंद मिश्रा की एक रिपोर्ट...

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कारोबार संभालने आए थे
हरदोई से मौजूदा सांसद और भाजपा प्रत्याशी जय प्रकाश मूलरूप से उन्नाव जनपद के मुंडा गांव के निवासी हैं। उनके पिता बाबू जगन्नाथ प्रसाद राजनीति में सक्रिय थे। वह विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके थे और पुराने नेताओं के साथ-साथ भाजपा के 90 के दशक के संगठन के जिम्मेदारों से उनके अच्छे संबंध थे। हरदोई में उनकी एक गैस एजेंसी थी, जो अब भी है। इसकी देखरेख के लिए जय प्रकाश का हरदोई आना जाना होता था। 1991 में राम लहर के दौरान भाजपा को हरदोई लोकसभा क्षेत्र से जिताऊ प्रत्याशी की तलाश थी।

चुनाव जीतने में कामयाब रहे जयप्रकाश
इसी दौरान तब के दिग्गज नेता गंगा भक्त सिंह की नजर बाबू जगन्नाथ प्रसाद के बेटे जय प्रकाश पर पड़ी। उन्होंने जगन्नाथ प्रसाद से बात की और फिर जगन्नाथ प्रसाद अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हुए। उन दिनों के भाजपा जिलाध्यक्ष गंगा सिंह चौहान और जिला महामंत्री रामबली मिश्रा से भी जगन्नाथ प्रसाद के अच्छे संबंध थे। जय प्रकाश में जीत की संभावनाएं नजर आईं,  तो यह लोग भी राजी हो गए। इसके बाद बाबू जगन्नाथ प्रसाद ने अपने संबंधों व संपर्कों का इस्तेमाल कर जयप्रकाश को टिकट दिला दिया और वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 1991 से शुरू हुए जय प्रकाश का राजनीतिक सफर अब भी जारी है।

मुलायम सिंह के कहने पर विरासत संभालने आगे आईं
जनपद के दिग्गज नेता रहे परमाई लाल की मुलायम सिंह यादव से दोस्ती जगजाहिर थी। दरअसल परमाई लाल ने राजनीतिक सफर तो जनसंघ से शुरू किया था, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि उन्हें अलग राह पकड़नी पड़ी। वर्ष 1967 में वह मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए और फिर अंतिम सांस तक मुलायम सिंह के साथ रहे। 1992 में परमाई लाल के निधन के बाद उनकी पत्नी जदुरानी 1993 में विधायक बनीं। इसी बीच परमाई लाल के बड़े बेटे लाल बिहारी लालू का निधन हो गया। लाल बिहारी की पत्नी ऊषा वर्मा राजनीतिक परिवेश में घर संभालती थीं।
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1998 में ऊषा वर्मा लोकसभा का चुनाव लड़ीं
उधर, जदुरानी का भी निधन हो गया। कम उम्र में ही पति का निधन और दो छोटे बच्चों की परवरिश में लगीं ऊषा वर्मा को मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ बुलाकर मुलाकात की। उन्हें राजनीतिक विरासत संभालने के लिए आगे आने को कहा और हर संभव मदद को लेकर आश्वस्त किया। 1998 में ऊषा वर्मा लोकसभा का चुनाव लड़ीं और जीतने में कामयाब रहीं। 1999 में चुनाव हारीं, लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में अहिरोरी से विधायक चुनी गईं और फिर मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में बाल विकास पुष्टाहार राज्यमंत्री बनीं। 2004 और 2009 में भी सांसद चुनी गईं और एक बार फिर सपा से प्रत्याशी हैं।
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