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एचएएल ने बनाया देश का पहला विंग सिविल वायुयान: डीजीसीए से मिला टाइप सर्टिफिकेट, आपात सेवाओं में होगा मददगार

Tue, 17 Aug 2021 02:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

एचएएल अफसरों के मुताबिक, 19 सीटर यह विमान आपात सेवाओं, दुर्गम इलाकों की हवाई पड़ताल, फोटो-वीडियोग्राफी, यात्रियों को लाने और ले जाने में कारगर साबित होगा।
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देश का पहला सिविल वायुयान - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। संस्थान द्वारा विकसित सिविल वायुयान हिंदुस्तान-228 को डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) का टाइप सर्टिफिकेट मिलने के बाद सोमवार से इसका लो स्पीड टैक्सी ट्रायल शुरू कर दिया गया।
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एचएएल अफसरों के मुताबिक, 19 सीटर यह विमान आपात सेवाओं, दुर्गम इलाकों की हवाई पड़ताल, फोटो-वीडियोग्राफी, यात्रियों को लाने और ले जाने में कारगर साबित होगा। संस्थान के परिवहन वायुयान प्रभाग (टीएडी) ने देश के प्रथम फिक्स्ड विंग सिविल वायुयान का ट्रायल भी शुरू कर दिया है।

पहले दिन का ट्रायल उम्मीदों के मुताबिक रहा। इस हल्के परिवहन वायुयान का निर्माण केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के तहत शुरू किया गया है। भविष्य में इसका इस्तेमाल हवाई निगरानी, एयर एंबुलेंस जैसे कार्यों में आसानी से किया जा सकेगा, जो स्थानीय स्तर पर अभी संभव नहीं हो पा रहा था।
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अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन की दावेदारी आसान
संस्थान के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (उपसाधन समूह) सजल प्रकाश के अनुसार, हिंदुस्तान-228 का टाइम सर्टिफिकेशन देश के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ेगा। डीजीसीए निदेशक इंद्रनील चक्रवर्ती ने कहा कि महानिदेशालय की तरफ से दिए गए टाइप सर्टिफिकेट से एचएएल वायुयान के अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन की दावेदारी कर सकेगा। बताया कि एक दिन पहले ही टाइप सर्टिफिकेशन के अनुपालन प्रदर्शन के चरण को पूरा कर लिया गया है। इस मौके पर एचएएल, डीजीसीए और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह होगी खासियत
- 19 सीटर हिंदुस्तान-228 मल्टीरोल यूटिलिटी वायुयान होगा। 
- वीआईपी व यात्री परिवहन, एयर एंबुलेंस, क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) में इसका इस्तेमाल हो सकेगा।
- पैराजंपिंग, हवाई निगरानी, बाढ़ या सुरक्षा की दृष्टि से दुर्गम स्थानों में फोटो व वीडियोग्राफी की जा सकेगी।
- एचएएल ने प्रशिक्षण, अनुरक्षण और लॉजिस्टिक्स की निर्बाध सहायता के साथ इस वायुयान को केंद्र सरकार की पहल के अनुरूप विकसित किया है।
- आम यात्रियों के परिवहन, राज्य सरकारों के जरिये राज्य के अंदर और अन्य राज्यों के बीच संपर्क के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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