देरी से कर सकेंगे आजाद गौरव की बुआई
सरसों को आजाद गौरव प्रजाति को विकसित करने वाले वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने बताया कि इस प्रजाति की अति विलंब की दशा में (20 नवंबर से 30 नवंबर) तक बुआई की जा सकती है। यह 120 से 125 दिनों में पककर तैयार होती है।
उत्पादन क्षमता 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 39 से 40 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इसका दाना मोटा है। इसमें कीड़े और रोगों का प्रकोप अन्य प्रजातियों की अपेक्षा कम होता है। कोहरे से भी काफी हद तक यह प्रजाति बची रहती है।
128 दिनों में तैयार हो जाती है आजाद प्रज्ञा
अलसी की इस प्रजाति को विकसित करने वाली वैज्ञानिक डॉ. नलिनी तिवारी ने बताया कि प्रदेश के सिंचित क्षेत्रों के लिए यह प्रजाति विकसित की गई है। इसकी उपज 20 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और 128 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। तेल की मात्रा 35 प्रतिशत है जो अन्य की तुलना में 11.22 प्रतिशत अधिक है। यह प्रजाति रोग और कीटों के प्रति सहनशील है।