गणेश उत्सव के शुभकामना संदेश
- फोटो : amar ujala
सज गए पंडाल, आज विराजमान होगें गणपति बप्पा
साउथ में कोविड महामारी के बाद इस वर्ष गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा। पराग डेरी से दीप तिराहा के बीच गणपति बप्पा की मूर्ति की खरीदारी हुई। दिनभर सडक में चहलपहल बनी रही। पंडाल सज गए। पंडाल और घर गाजबाजे के साथ भक्त मूर्तियां घर ले गए। बुधवार से 10 दिन के लिए पंडाल में गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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कमेटी अध्यक्ष चंद्रधर सिंह ने बताया कि बाबूपुरवा में पैराडाइस ग्रुप श्री सेतुबंध मंदिर में 8 वां गणेश उत्सव मनाया जाएगा। बुधवार सुबह मिट्टी की सात फिट की मूर्ति की स्थापना होगी। रोजाना अलग अलग कार्यक्रम भी होंगे। बर्रा विश्व बैंक जे ब्लॉक पार्क में जन अधिकार एसोसिएशन की ओर से 18 वां गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। समिति अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी कल से 5 अगस्त तक महोत्सव मनाया जाएगा।7 सितंबर को भंडारा होगा। मेधावियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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आज विराजेंगे गणपति महाराज, बनाएंगे सबके काज
बाबा श्री आनंदेश्वर सामाजिक समिति के कोषाध्यक्ष कपिल तिवारी जी ने बताया कि गणेश उत्सव की तैयारियां पूरी हो गई है। समिति की ओर से आयोजित श्री गणेश महोत्सव में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सुबह नौ बजे से आचार्य गण वैदिक रीति नीति से कराएंगे। उत्सव में कार्यक्रमों के साथ बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। साथ ही 10 दिवसीय उत्सव में भजन सांध्या, सुंदरकांड, डांस प्रतियोगिता, डांडिया प्रतियोगिता, भंडारा और महाआरती जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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सात लाख के चांदी के रथ में निकलेंगे गणपति
निराला नगर निवासी अतुल अवस्थी ने गणपति बप्पा के लिए चांदी का रथ बनवाया है। इस रथ की कीमत सात लाख रुपये बताई जा रही है। काकादेव में कोचिंग चलाने वाले अतुल अवस्थी नेे बताया कि वे 22 साल से गणेश महोत्सव में मुंबई से बप्पा की प्रतिमा लाकर स्थापित करते हैं। इस साल उन्हीं की कृपा से रथ बनवाया है। बुधवार को दीप टाकीज तिराहे से इसी रथ पर बप्पा विराजमान होंगे। रथ को चार घोड़े खींचेंगे। रथयात्रा निकालने के बाद घर में बप्पा की स्थापना की जाएगी।
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400 वर्ष पुराना है बिठूर का गणेश मंदिर
बिठूर का गणेश मंदिर इतिहास आदि काल से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। मंदिर गंगा जी के तट पर लवकुश नगर में स्थित है। मंदिर में गणेश जी का मुख पूर्व दिशा की ओर है। सूर्य और चंद्रमा की प्रथम किरण सीधे गणेश भगवान की मूर्ति के ऊपर पड़ती है। सिद्ध विनायक होने के नाते गणेश भगवान के ऊपर सिंदूर चढ़ाया जाता है।
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यहां दिन भर भक्तों का ताता लगा रहता है। मंदिर में मोदक का भोग और दूब घास चढ़ाया जाता है। पुजारी प्रकाश टाकिलेकर ने बताया एक बार अंग्रेजी सेना ने मंदिर को तोप से उड़ाना चाहा लेकिन गणेश बप्पा की कृपा से गंगा की बाढ़ से इतनी बालू आ गई कि अंग्रेजों को मंदिर का ही नहीं पता चल सका। गणेश भगवान की म्रूिर्त भी अन्य मूर्तियों से भिन्न है। इनका सूड़ दाहिनी तरफ है और मूसक पर सवार हैं, ऐसी मूर्ति बहुत ही कम देखने को मिलती है।