अमर उजाला ने इन 31 सालों में शहर को बदलते देखा है... विकास के हर पथ पर हम साथ रहे, कदम कहां रखने हैं यह हमने बताया नहीं पर नजर जरूर रखी...! जाम से जूझता शहर... मेट्रो का सुहाना सफर और अपार्टमेंट कल्चर यह सब बढ़ते देखा है..। सालों से अटका रहा सीओडी पुल जब हमारी सुर्खियां बना तो राजनीतिक उछल कूद भी शुरू हुई। देर से ही सही अब पुल लोगों को राहत दे रहा है। विकास के पथ पर कदमताल करता शहर अब स्मार्ट सिटी कहलाने लगा है। शॉपिंग मॉल, मेट्रो, एम्यूजमेंट पार्क, लोकल एसी ई-बसें कभी बड़े शहरों को ही भाती थीं, अब कानपुर में सबसे पहले आती हैं। एयरपोर्ट से हमने उड़ान भरनी शुरू कर दी है। शताब्दी के साथ-साथ हम वंदे भारत (टी-18 ट्रेन) वाले भी हैं।
अरे...यहां कहां मेट्रो चलेगी.. शहर में जगह भी है.. जाम ही लगा रहता है.. अतिक्रमण कौन हटाएगा.. बवाल हो जाएगा.. कुछ नहीं होगा..। यह बातेें आम लोगों में तब होती थी जब मेट्रो की योजना पर विचार चल रहा था। जब योजना जमीन पर उतरने लगी तो लोगों को लगा कि सपना साकार होगा। 15 नवंबर 2019 को मेट्रो का शिलान्यास हुआ और 28 दिसंबर 2021 को शहर की पहली मेट्रो आईआईटी से मोतीझील तक दौड़ पड़ी।
नौ किलोमीटर लंबे रूट पर 14 महीने से मेट्रो चल रही है। कॉरिडोर-1 के अंतर्गत मोतीझील के बाद चुन्नीगंज में भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्य के साथ ही वहां से बड़ा चौराहा तक मार्च के पहले हफ्ते से भूमिगत मेट्रो सुरंग निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 23 किलोमीटर लंबे इसी कॉरिडोर में नौबस्ता तक निर्माण चल रहा है। शहर में मेट्रो कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए से बर्रा-8 तक मेट्रो रूट निर्माण की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन ने इस कॉरिडोर में चार-पांच महीने में निर्माण शुरू करने की योजना बनाई है। दिसंबर 2024 तक निर्माण पूरा कराने का लक्ष्य है।
1980 में बनी ऊंची अटरिया...तब जाना फ्लैट भी है रहने का जरिया
1 मार्च 1992 को जब शहर में अमर उजाला ने कदम रखा तो शहर भी आकार ले रहा था। कहने को तो 1980 में शहर का पहला अपार्टमेंट बन चुका था लेकिन लोगों ने उसे अपनाना 1992 से ही शुरू किया था। जमीन की बढ़ती कीमतें, जमीनों की उपलब्धता की कमी के कारण लोगों ने अपार्टमेंट कल्चर को ही अपनाने में समझदारी मानी। फिर क्या था धीरे-धीरे शहर का स्वरूप बदलने लगा।
1980 में मनोहर लाल डुडेजा और मोहन संतवानी ने स्वरूपनगर में 14 फ्लैट बनाए थे, तब शहर में फ्लैट कल्चर नहीं था। ज्यादातर लोग कहते थे कि फ्लैट में कौन रहेगा? तक लोगों की प्राथमिकता अपना मकान बनाने की थी, जिसमें वे जमीन से लेकर छत तक उपयोग कर सकें और जरूरत पड़ने पर ऊपर भी निर्माण करा सकें। तब ये फ्लैट चार साल में बिक पाए थे। 1983-84 में किशोर बंधु ने कैंट में नवशील धाम और तिलकनगर में बसंतकुंज के नाम से 88 फ्लैट बनाए और चौथे अपार्टमेंट के रूप में 1987 में स्वरूपनगर में ही रतन हाउसिंग ने छह मंजिला पंचरतन अपार्टमेंट बनाया।
1992 के बाद शहर में धीरे-धीरे अपार्टमेंट कल्चर की शुरुआत हुई। अब कंपनीबाग चौराहे के पास 28 मंजिल के अपार्टमेंट में भी लोग रह रहे हैं। धीरे - धीरे पुराने मकानों को तोड़कर भी अपार्टमेंट बनने लगे। स्वरूपनगर जैसे पॉश इलाके से लेकर चमनगंज, बेकनगंज, हटिया जैसे घनी आबादी वाली मोहल्लों से लेकर नवविकसित क्षेत्रों में मौजूदा समय में भी सौ से ज्यादा अपार्टमेंट बन रहे हैं। मैनावती मार्ग, भौंती, कालपी रोड पर भी टाउनशिप बनाने की तैयारियां हो रही हैं। कानपुर प्रमोटर एंड बिल्डर्स एसोसिएशन के सचिव अनूप अस्थाना ने बताया कि शहर में फ्लैट की डिमांड और सप्लाई अच्छी है। जैसे - जैसे शहर का विकास होगा, अपार्टमेंट कल्चर बढ़ता जाएगा।
अब हम कहलाते स्मार्ट सिटी वाले
कानपुर को स्मार्ट करने के लिए पौने पांच साल पहले स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू हुई। 1000 करोड़ की इस परियोजना के तहत शहर में 66 विकास कार्य होने थे। इनमें से स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, नानाराव पार्क, कारगिल पार्क के सुंदरीकरण, ओपन जिम, फसाड लाइटिंग, आईसीसीसी, ग्रीन पार्क में विजिटर गैलरी, बैडमिंटन, टीटी हाल, बुर्ज खलीफा की तर्ज पर केईएम हाल फूलबाग में प्रोजेक्शन मैपिंग से फिल्मों का प्रस्तुतिकरण, ई-पाठशाला, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन सहित 40 से ज्यादा कार्य पूरे हो गए हैं।
शहरवासियों को इनका लाभ भी मिलने लगा है। दूसरी तरफ कन्वेंशन सेंटर, कलक्ट्रेट में सात मंजिला पार्किंग, नानाराव पार्क तरणताल का नवीनीकरण का काम चल रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजना पूरी करने की समयावधि जून 2023 है, तब तक सभी कार्य पूरे करने के आदेश दिए गए हैं।
31 साल में हुए विकास कार्य
- गंगा बैराज का निर्माण, इसमें रंग-बिरंगी फसाड लाइटिंग और आसपास अटल घाट, बोट क्लब, बैराज रोड का निर्माण, बॉटनिकल गार्डेन का निर्माण भी प्रस्तावित
- गंगा को गंदगी से निजात दिलाने के लिए जाजमऊ में टेनरियों का जहरीला पानी शोधित करने के लिए 36 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) क्षमता का कॉमन क्रोम इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) एवं 181 एमएलडी क्षमता के तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), बिनगवां में 210 एमएलडी क्षमता का एसटीपी, सजारी में 46 एमएलडी क्षमता के एसटीपी, बनियापुरवा में 15 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण एवं संचालन
- एनएच-2 में जाम से निजात दिलाने के लिए भौंती से रूमा तक 24 किलोमीटर लंबा उपरिगामी मार्ग
- कारगिल पार्क, बाल उद्यान, नानाराव पार्क, फूलबाग का सुंदरीकरण
- बुर्ज खलीफा की तर्ज पर फूलबाग में अत्याधुनिक तकनीक से केईएम हाल की दीवार पर फिल्म संचालन
- स्पोर्ट्स हब का निर्माण एवं संचालन
- पार्कों में ओपन जिम निर्माण
- पनकी में कूड़ा निस्तारण प्लांट, हर जोन में अत्याधुनिक कूड़ाघरों के निर्माण और संचालन के साथ ही कूड़े से जैविक खाद बनना
- छुट्टा मवेशियों से निजात दिलाने के लिए कान्हा उपवन, पनकी में अस्थाई गोवंश संरक्षण केंद्र में 6000 से ज्यादा छुट्टा मवेशियों का भरण - पोषण
- मार्ग प्रकाश के लिए बल्ब, सोडियम की जगह एलईडी लाइटों से दूधिया रोशनी
सचेंडी का किला आजाद कराया, इदरीश को कैद
कान्हपुर (कानपुर) के जन्मदाता कहे जाने वाले राजा हिंदू सिंह चंदेल के सचेंडी स्थित किले की जमीन पर अवैध कब्जा कर बिक्री करने का मामला अमर उजाला ने 23 अप्रैल 2013 के अंक में उठाया था। इसके बाद लगातार खबरें प्रकाशित की गईं। आखिर में आठ सितंबर 2013 को इस संपत्ति को जिलाधिकारी ने पब्लिक लैंड घोषित किया था। इस खबर पर अमर उजाला को कर्पूर चंद कुलिश अवार्ड भी मिला था।
पाकिस्तान के पूर्व संघीय मंत्री अंसार बर्नी ने ट्विट कर कहा था भारत में पाकिस्तानी नागरिक इदरीश खाना-कपड़ा और दवाओं से महरूम है। पड़ताल में सामने आया कि वह पुलिस लाइन में अलग कमरे में ठाठ-बाट से रह रहा था। उसने फर्जी आईडी से सिम भी हासिल कर लिया था और पाकिस्तान में बात करता था। यह खुलासा अमर उजाला ने 24 फरवरी 2013 के अंक में किया था। आखिर में एक मार्च को इदरीश को गिरफ्तार कर लिया गया। इस खबर पर भी अमर उजाला को खोजी पत्रकारिता के लिए कुलिस अवार्ड मिला था।
लाइलाज बीमारियों में स्टेम सेल प्रत्यारोपण उम्मीदों की किरण
मां की कोख या फिर प्रसव के वक्त मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से शिशु को होने वाली दिक्कत सेरिब्रल पाल्सी विद डेवलपमेंटल डिले के रोगियों के लिए स्टेम सेल उम्मीद की नई किरण है। ऑक्सीजन की कमी से इन रोगियों के मस्तिष्क में दिक्कत आने से इन्हें एक तरह की दिव्यांगता की स्थिति में जीवन काटना पड़ता है। मानसिक विकास में कमी की वजह से शारीरिक गतिविधियां भी निष्क्रय रहती हैं। इस रोग को लाइलाज माना जाता है, लेकिन स्टेम सेल प्रत्यारोपण से रोगियों की स्थिति में सुधार आ रहा है। स्टेम सेल की डोज लेने के बाद बालरोगी हिलने-डुलने के साथ घरवालों को पहचान लेते हैं और उन्हें आवाज देकर पुकारते हैं। इसके अलावा अन्य जेनेटिक बीमारियों में भी अच्छे नतीजे आ रहे हैं।
हैलट में दो वर्षों से स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया जा रहा है। प्रदेश का यह पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज है, जहां यह थेरेपी दी जा रही है। अब तक विभिन्न रोगों के 152 रोगियों को स्टेम सेल प्रत्यारोपित की गई हैं। इनमें सबसे अधिक सेरिब्रल पाल्सी विद डेवलपमेंटल डिले के रोगी सबसे अधिक हैं। इसके अलावा रीढ़ की चोट, विभिन्न प्रकार की मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, ऑटिज्म, पार्किंसंस आदि के रोगी हैं। इसके अलावा नेत्र रोग में भी स्टेम सेल का इस्तेमाल किया गया है। रतौंधी से जिन रोगियों की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई थी, उन्हें इससे लाभ मिला है। रोगियों की आंखों में इतनी रोशनी आ गई कि वह सामने की चीजों को देख सकते हैं। इसके अलावा डायबिटीज के एक रोगी में भी स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया। दवाओं से नियंत्रित न होने वाला ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित होने लगा और एचबीए1सी कम हुई है।
लाइलाज बीमारियोें में कारगर स्टेम सेल
लाइलाज माने जाने वाली बहुत सी बीमारियों में स्टेम सेल काम कर रही है। इसके साथ ही रीढ़ की चोट, डायबिटीज, न्यूरो संबंधी दूसरी तकलीफों में भी अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। स्टेम सेल रोगी के शरीर से ही ली जाती हैं और एक प्रक्रिया से गुजारने के बाद दोबारा शरीर में डाल दी जाती हैं। इससे कोई दुष्प्रभाव का खतरा नहीं रहता। आने वाले दिनों में इसे और भी बीमारियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।- डॉ. बीएस राजपूत, स्टेम सेल प्रत्यारोपण विशेषज्ञ, विजिटिंग प्रोफेसर, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
स्टेम सेल प्रत्यारोपण के रोगियों के आंकड़े
सीपी विद ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले : 50
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी : 50
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी : 30
नेत्र रोग : 15
ऑटिज्म : 3
पार्किंसंस : 3
डायबिटीज : 1
उत्साहजनक परिणाम
केस : एक
मध्यप्रदेश के रहने वाले 35 वर्षीय रतौंधी के रोगी की रोशनी बिल्कुल चली गई थी। वह सहारे से चलता था। हैलट के नेत्र रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने उसकी आंख में स्टेम सेल थेरेपी दी। एक महीने के बाद जब वह दिखाने आए तो उसे इतना दिखने लगा था कि सहारे की जरूरत नहीं थी। डॉ. खान ने बताया कि रोगी की आंख में रोशनी और बढ़ेगी। यह एक महीने का नतीजा है।
केस : दो
दर्शनपुरवा का रहने वाले पांच साल के बालरोगी को सीपी विद ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले की दिक्कत थी। वह हिलता-डुलता नहीं था और न ही आवाज देने पर कोई रिस्पांस देता था। स्टेम सेल की पहली डोज के बाद उसके शरीर में हरकत आई और मां को पुकारा। इसके साथ ही आसानी से करवट ले लेता है। फॉलोअप में दिखाने आ रहा है।
अमर उजाला ने मुद्दों को उठाया, मुकाम तक पहुंचाया
अनवरगंज-मंधना के बीच 18 रेलवे क्रासिंग की वजह से जीटी रोड पर लगने वाले जाम को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद समाजसेवी संगठन भी साथ में आए और अमर उजाला की आवाज को बुलंद किया। नतीजतन शासन और प्रशासन के साथ ही रेलवे ने भी इसका संज्ञान लिया। सर्वे कराया गया, फिजिबिलिटी रिपोर्ट के बाद रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिली। तय हुआ कि जरीब चौकी से आईआईटी तक 14 रेलवे क्रासिंग के ऊपर एलिवेटेड ट्रैक बनेगा। प्रदेश सरकार के बजट में इसका प्रस्ताव भी किया गया है।
- 28 अप्रैल 2022 की माईसिटी पेज वन की खबर- जाम क्यों न लगे...24 में 13 घंटे तो बंद रहती जरीब चौकी क्रासिंग
महिला स्टेशन का दर्जा पाए गोविंदपुरी स्टेशन पर नहीं था शौचालय
आठ मार्च 2020 को प्रदेश सरकार की ओर से गोविंदपुरी स्टेशन को महिला स्टेशन का दर्जा दिया गया था। हालांकि यहां पर यात्रियों के लिए शौचालय का इंतजाम नहीं था। इससे महिला यात्रियों को खासी परेशानी होती थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। इसके बाद डीआरएम ने शौचालय बनवाने का निर्देश दिया।
- 10 मार्च 2020 को माई सिटी पेज तीन पर प्रकाशित खबर में गोविंदपुरी स्टेशन पर एक भी यात्री शौचालय न होने का मुद्दा उठाया
विकास की गति और होगी तेज
आने वाले तीन वर्षों में कानपुर में विकास की गति और तेज होगी। मेट्रो के दूसरे चरण से लेकर एयरपोर्ट टर्मिनल, रिंग रोड जैसे कई बड़ेे प्रोजेक्ट धरातल पर दिखने लगेंगे। शहर के ट्रैफिक सिस्टम को लेकर अभी काम करना है। इसी तरह प्रदूषण दूर करने को लेकर भी योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता है। शहर को स्पोर्ट सिटी के रूप में विकसित करने का काम भी तेजी से चल रहा है। - डॉ. राजशेखर मंडलायुक्त
विजन-2047 पर चल रहा काम
शहर के विकास को लेकर विजन-2047 पर काम चल रहा है। आने वाले 25 वर्षों में कानपुर कैसा दिखेगा, इसके लिए लगातार प्रयास चल रहा है। जो भी विकास कार्य प्रस्तावित हैं या निर्माणाधीन हैं, वे निर्धारित समय पर पूरे हों, इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जाएगी। यातायात, पर्यटन के क्षेत्र में भी अभी काफी काम किए जाने की संभावना है।- विशाख जी. जिलाधिकारी
अमर उजाला में संपूर्णता है
अमर उजाला जीवन के विभिन्न क्षेत्रों की भरपूर कवरेज करता है। यह किसी विचारधारा से प्रभावित नहीं लगता है। वास्तव में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की परिकल्पना को साकार करता है। सम-सामायिक समाचारों की प्रस्तुति बहुत अच्छी तरह की जाती है।- प्रो. नरेंद्र मोहन, निदेशक नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट
वाकई में उजाला है
मैं अमर उजाला के लॉचिंग कार्यक्रम में मौजूद रही थी। तब से इस समाचार पत्र की नियमित पाठक हूं। यह वाकई में मीडिया का उजाला है और मेरी शुभकामनाएं हैं कि यह अमर रहेगा। अमर उजाला की एक विशेषज्ञता इसकी निष्पक्षता है। सभी के विचारों को स्थान देता है।- डॉ. आरती लालचंदानी, पूर्व प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
जो छपता है, उस पर भरोसा होता है
अमर उजाला में जो छपता है, उस पर भरोसा होता है। कानपुर में जब से यह समाचार पत्र शुरू हुआ है। इसका पाठक हूं। यह अति विश्वसनीय समाचार पत्र है। इसमें संपूर्णता रहती है। किसी विचारधारा का एकतरफा पक्षधर नहीं है। आगे भी यह विश्वसनीयता बरकरार रहेगी।- डॉ. वीएन त्रिपाठी, पूर्व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश
उजाला इसी तरह फैलता रहे
जब से शहर से छपना शुरू हुआ है, उस पहले दिन से ही अमर उजाला पढ़ रहा हूं। यह अखबार की साख ही है कि टीवी चैनल वाले उसका जिक्र करते हैं। अमर उजाला समाचार पत्र हमारा सच्चा साथी है। दुआ करते हैं कि इसी तरह विश्वसनीयता बनाए रखे और इसका उजाला हर दिशा में फैलता रहे।- सैयद अबुल बरकात नजमी, सज्जादानशीं, खानकाह हजरत दादा मियां, बेकनगंज